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मानसून में बार-बार पड़ते हैं बीमार? आयुर्वेद के ये 5 आसान उपाय बढ़ाएंगे इम्युनिटी

मानसून में बार-बार पड़ते हैं बीमार? आयुर्वेद के ये 5 आसान उपाय बढ़ाएंगे इम्युनिटी

बारिश का मौसम राहत तो देता है, लेकिन साथ ही संक्रमण, सर्दी-खांसी और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। ऐसे समय में खानपान और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बना सकते हैं। आयुर्वेद भी मानसून में शरीर की विशेष देखभाल पर जोर देता है।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा?

बरसात के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इसके कारण सर्दी, खांसी, बुखार, गले का संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियां आम हो जाती हैं। आशा आयुर्वेदा क्लीनिक की डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार इस मौसम में शरीर के वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं।

वात, पित्त और कफ का असंतुलन कैसे करता है प्रभावित?

आयुर्वेद के अनुसार ठंडी और नम हवा शरीर में वात दोष बढ़ाती है, जिससे जोड़ों में दर्द, अकड़न, शरीर में भारीपन और थकान महसूस हो सकती है। वहीं बारिश के बाद वातावरण में बढ़ी नमी और गर्म भाप पित्त दोष को बढ़ाती है, जिससे एसिडिटी, पेट में जलन और पाचन कमजोर हो सकता है। जिन लोगों को मौसम बदलते ही सर्दी, खांसी और कफ की शिकायत होने लगती है, उनमें कफ दोष बढ़ने की संभावना अधिक रहती है।

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये 5 आयुर्वेदिक उपाय

डॉक्टर चंचल शर्मा मानसून में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाने की सलाह देती हैं। हल्दी वाला गुनगुना दूध एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है और संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है। आंवला विटामिन-सी का अच्छा स्रोत माना जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक है। च्यवनप्राश का नियमित और सीमित मात्रा में सेवन ऊर्जा तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में लाभदायक माना जाता है। इसके अलावा ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पीना और केवल प्यास लगने पर ही पानी पीना पाचन के लिए बेहतर माना जाता है।

योग और दिनचर्या भी निभाते हैं अहम भूमिका

बरसात में आलस्य बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन लंबे समय तक निष्क्रिय रहना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। हल्का व्यायाम और योग शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। प्राणायाम, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, त्रिकोणासन और भुजंगासन जैसे योगाभ्यास शरीर की ऊर्जा बनाए रखने और श्वसन तंत्र को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि यदि किसी को पहले से कोई बीमारी है, तो योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अभ्यास करें।

मानसून का आनंद तभी लिया जा सकता है, जब शरीर स्वस्थ रहे। संतुलित आहार, स्वच्छता, पर्याप्त आराम, गुनगुना पानी, आयुर्वेदिक खानपान और नियमित योग जैसी आदतें इस मौसम में आपको संक्रमण से बचाने में मदद कर सकती हैं। यदि बुखार, सांस लेने में तकलीफ या कोई गंभीर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।


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