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युवा महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा कोलन कैंसर का खतरा, इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

युवा महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा कोलन कैंसर का खतरा, इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

एक समय था जब कोलन कैंसर को बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब इसकी तस्वीर तेजी से बदल रही है। हाल के वर्षों में कम उम्र के लोगों, खासकर महिलाओं में इसके मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, खानपान और लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए समय रहते इसके संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है।

शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे लगते हैं

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण कई बार पीरियड्स के दर्द, पेट फूलने, पेट में ऐंठन या मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे महसूस हो सकते हैं। यही कारण है कि कई महिलाएं इन्हें सामान्य समस्या समझकर अनदेखा कर देती हैं। यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार लौटें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

किन कारणों से बढ़ सकता है जोखिम?

विशेषज्ञों के अनुसार, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, कम फाइबर वाला आहार और निष्क्रिय जीवनशैली आंतों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। फाइबर की कमी से आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया पर असर पड़ता है, जिससे सूजन और अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, कोलन कैंसर कई कारणों से हो सकता है और केवल खानपान ही इसका एकमात्र कारण नहीं माना जाता।

तनाव और खराब जीवनशैली भी हो सकती है वजह

लंबे समय तक रहने वाला क्रोनिक स्ट्रेस, पर्याप्त नींद की कमी और असंतुलित दिनचर्या भी शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर डालती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार तनाव आंतों के सामान्य कार्य को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति में कैंसर होने का जोखिम कई जैविक, आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों पर भी निर्भर करता है।

कब करानी चाहिए जांच?

यदि आपको लंबे समय से मल त्याग की आदतों में बदलाव, मल में खून, लगातार पेट दर्द, बिना वजह वजन कम होना, लगातार थकान या आयरन की कमी (एनीमिया) जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इन्हें हल्के में न लें। डॉक्टर आपकी उम्र, पारिवारिक इतिहास और लक्षणों के आधार पर आवश्यक जांच, जैसे कोलोनोस्कोपी, की सलाह दे सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास है, उन्हें विशेष रूप से नियमित जांच के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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बचाव के लिए अपनाएं स्वस्थ आदतें

कोलन कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए संतुलित और फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी तथा स्वस्थ वजन बनाए रखना फायदेमंद माना जाता है। नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती लक्षणों पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

कोलन कैंसर अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं माना जा रहा। युवाओं, विशेषकर महिलाओं में इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए जागरूक रहना और शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है। ध्यान रखें, हर पेट दर्द या थकान कैंसर का संकेत नहीं होती, लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें या असामान्य हों, तो स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित कदम है।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.