देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो दुकानदारों को किए जाने वाले बड़े UPI भुगतान पर 0.25% से 0.40% तक का शुल्क लग सकता है। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर और छोटे भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
टैक्सेशन बिल में किया गया अहम प्रस्ताव
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल’ पेश किया है। इस विधेयक में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर MDR लगाने की रोक हटाने का प्रस्ताव शामिल है। हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह व्यवस्था कब से लागू होगी।
किन ट्रांजैक्शन पर होगा असर?
प्रस्ताव के अनुसार केवल 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान इस दायरे में आ सकते हैं। यानी यदि ग्राहक किसी दुकान, शोरूम या व्यापारी को बड़ी रकम का भुगतान करता है, तभी MDR लागू हो सकता है। वहीं, एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा।
रोजमर्रा की खरीदारी पर नहीं पड़ेगा असर
सरकारी अनुमान बताते हैं कि लगभग 95 प्रतिशत UPI ट्रांजैक्शन इस प्रस्ताव से प्रभावित नहीं होंगे। दूध, सब्जी, किराना, मेडिकल स्टोर, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी जैसी रोजमर्रा की छोटी खरीदारी पर पहले की तरह कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। जुलाई में UPI के जरिए करीब 23.7 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। इनमें अधिकांश भुगतान 2,000 रुपये से कम के थे।
सरकार तय कर सकती है अधिकतम सीमा
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR लागू किया जाता है, तो सरकार इसकी अधिकतम सीमा भी तय कर सकती है। चूंकि UPI ट्रांजैक्शन में क्रेडिट कार्ड की तरह फंडिंग कॉस्ट नहीं होती, इसलिए बहुत अधिक शुल्क की संभावना कम मानी जा रही है। साथ ही, यह भी जरूरी नहीं कि सभी व्यापारी यह शुल्क ग्राहकों से ही वसूलें।
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह बदलाव?
वर्तमान में डेबिट और क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR लिया जाता है, जिससे बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को डिजिटल पेमेंट सिस्टम के संचालन की लागत पूरी करने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि UPI के लगातार बढ़ते उपयोग के बीच भुगतान प्रणाली को टिकाऊ बनाए रखने के लिए भी इस तरह के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और सरकार ने इसे लागू करने की तारीख तय नहीं की है। लेकिन यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो इसका असर मुख्य रूप से बड़े व्यापारिक UPI भुगतान पर ही दिखाई देगा। आम उपभोक्ताओं के छोटे लेनदेन और व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI ट्रांसफर पहले की तरह निशुल्क रहने की संभावना है।
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