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मोबाइल की बजाय पुस्तकों के अध्ययन को प्राथमिकता दें: उपविभागीय अधिकारी डॉ. श्रीमंत हारकर

Give priority to studying books instead of mobile: Sub-Divisional Officer Dr. Shrimant Harkar

*शांतिनिकेतन में प्रतिभावान छात्रों का सत्कार समारोह

जालना: मोबाइल का उपयोग आज के समय में अनिवार्य हो गया है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से मस्तिष्क और क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसे ध्यान में रखते हुए, छात्रों को मोबाइल के उपयोग पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए और अधिक से अधिक अच्छे ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए. यह सलाह उपविभागीय अधिकारी डॉ. श्रीमंत हारकर ने आज दी.

शहर के संभाजीनगर क्षेत्र में स्थित शांतिनिकेतन विद्यालय में सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन गुरुवार  को डॉ. हारकर के कर-कमलों द्वारा किया गया. इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों और परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों के सत्कार समारोह में वे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे.
समर्थ शिक्षण प्रसारक मंडल के अध्यक्ष भास्करराव अंबेकर, पूर्व नगरसेवक अय्यूब पठान, गणेश घुगे, महेंद्र अकोले, पांडुरंग काले, संस्थान के संचालक प्रा. राम कदम, नंदकुमार जाधव, अश्विन अंबेकर और रविकांत जगधने प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे.

उपविभागीय अधिकारी डॉ. हारकर ने अपने संबोधन में कहा कि गुणवत्ता, अनुशासन और छात्रों के प्रति सच्ची निष्ठा का प्रतिबिंब शांतिनिकेतन विद्यालय में दिखता है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह संस्था भी रयत शिक्षण संस्था की तरह समृद्धि प्राप्त करे. ग्रीन एनर्जी और स्वच्छ पेयजल के महत्व को उन्होंने समझाया. 

कार्यक्रम का संचालन आशीष रसाल ने किया. इस अवसर पर राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर खेल, कला, वाद-विवाद, स्वच्छता मॉनिटर जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं, आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों का सम्मान किया गया. 
कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रधानाध्यापक और शिक्षक मंडल ने प्रयास किए. बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों की उपस्थिति इस समारोह में देखी गई.

*प्रशासन का सहयोग और जनसमर्थन आवश्यक: भास्कर अंबेकर

जालना शहर में कुछ विद्यालय ऐसे हैं जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सरकारी सहायता या  दानदाताओं का समर्थन नहीं मिल रहा है. इसके बावजूद, शिक्षक ईमानदारी से छात्रों को तैयार करने का कार्य कर रहे हैं. ऐसे विद्यालयों का सर्वेक्षण करके प्रशासन और दानदाताओं को उन्हें सहयोग प्रदान करना चाहिए. 
भास्करराव अंबेकर ने इस अवसर पर कहा कि संस्थान ने अपने खर्चे पर सौर ऊर्जा परियोजना को क्रियान्वित किया है. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे शिक्षा के महत्व को पहचानें और अपने अभिभावकों के सपनों को साकार करें.


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Imran Siddiqui

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