मुख्याध्यापक के निलंबन पर शिक्षक संगठनों का रोष, सात दिनों में निर्णय न हुआ तो आमरण अनशन की चेतावनी
जालना — राममूर्ति उर्दू जिला परिषद विद्यालय के मुख्याध्यापक अब्दुल्ला हुसैन बहकीम के निलंबन के विरोध में शिक्षक संगठनों का रोष बढ़ता जा रहा है।
विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया, तो जिला परिषद कार्यालय के समक्ष सामूहिक आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
शिकायत और संगठन की मांग
मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपे गए लिखित निवेदन में शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्ष 2015 में सम्पन्न हुए सपाटीकरण कार्य के संबंध में तैयार की गई रिपोर्ट गलत और भ्रामक है, जिसके आधार पर मुख्याध्यापक को निलंबित किया गया। उन्होंने कहा है कि 2015 से 2025 के बीच न तो स्कूल प्रबंधन समिति और न ही जिला खेल अधिकारी ने इस कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत की है।
निवेदन में यह भी उल्लेख है कि बहकीम ने निर्धारित समय पर सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ उपयोग प्रमाणपत्र जिला खेल अधिकारी को प्रस्तुत किए थे। इसके बावजूद, जिला खेल अधिकारी और कनिष्ठ अभियंता की रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ करते हुए, बाहर के दबाव में आकर भ्रामक रिपोर्ट तैयार की गई और उसके आधार पर निलंबन किया गया। शिक्षक संगठनों ने मामले की पुनर्समीक्षा और निलंबन रद्द करने की मांग की है।
आमरण अनशन की चेतावनी
निवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि सात दिनों के भीतर उचित और संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो सभी शिक्षक संगठन संयुक्त रूप से जिला परिषद कार्यालय के सामने सामूहिक आमरण अनशन करेंगे। उन्होंने प्रशासन से त्वरित और निष्पक्ष जांच कराकर दोषपूर्ण निर्णय वापस लेने की अपील की है।
हस्ताक्षरकर्ता
निवेदन पर कई शिक्षक प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जिनमें प्रमुख नाम ये हैं — संतोष राजगुरु, दीपक दराडे, राजेश सदावर्ते, संजय हेरकर, लक्ष्मण नेव्हल, मधुकर काकडे, उद्धव पवार, देवेंद्र बारगजे, सुभाष म्हस्के, सिद्धार्थ गजभिये, शिवाजी देवडे, मुकुंद खरात, संतोष डोगरखोस, दिगंबर राजे जाधव, अनंत मिटकरी, रोहिमल एल.ए., जावेद खान, राजेश मुंगीपैठणकर, परमेश्वर साळवे और शिवानंद खरात सहित अन्य कई प्रतिनिधि।

