बद्रीनारायण बारवाले महाविद्यालय में ‘आनंदनगरी’ का भव्य आयोजन, छात्रों को मिला व्यवसायिक अनुभव
जालना: बद्रीनारायण बारवाले महाविद्यालय में आयोजित वार्षिक स्नेह सम्मेलन के अंतर्गत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए विविध शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में महाविद्यालय परिसर में ‘आनंदनगरी’ (फूड एंड गेम्स फेयर) का भव्य और सफल आयोजन संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम में छात्रों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ सहभागिता की। ‘आनंदनगरी’ के आयोजन से महाविद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और आगंतुकों ने कार्यक्रम का आनंद लिया।
आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक शिक्षा पर जोर
‘आनंदनगरी’ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें व्यावहारिक जीवन की वास्तविकताओं से रूबरू कराना था। इस उपक्रम के अंतर्गत छात्रों ने छोटे-छोटे समूह बनाकर विभिन्न खाद्य पदार्थों एवं मनोरंजक खेलों के स्टॉल लगाए।
छात्रों द्वारा स्वयं तैयार किए गए स्वास्थ्यवर्धक, पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजनों को आगंतुकों से जबरदस्त प्रतिसाद मिला। कई स्टॉल पर तो कम समय में ही सामग्री समाप्त हो गई, जिससे छात्रों का उत्साह और आत्मविश्वास और बढ़ गया।
लाभ-हानि और व्यवसायिक समझ का प्रत्यक्ष अनुभव
महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल शैक्षणिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहारिक और व्यवसायिक समझ भी उतनी ही आवश्यक है। इसी सोच के तहत इस आयोजन के माध्यम से छात्रों को ‘लाभ और हानि’ (Profit and Loss), ग्राहक प्रबंधन, टीमवर्क, समय प्रबंधन और उद्यमशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम ने छात्रों को यह सिखाया कि सीमित संसाधनों में योजना बनाकर कार्य कैसे किया जाए और वास्तविक बाजार परिस्थितियों में निर्णय कैसे लिए जाते हैं।
शिक्षकवृंद और परीक्षकों का योगदान
इस उपक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के प्राध्यापकों और स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. कविता प्राशर, डॉ. भूषण नाफड़े, डॉ. क्षमा अनभुले, डॉ. स्वाती पुरी, प्रो. कांचन कायंदे, प्रो. वर्षा वानखेड़े, डॉ. वैशाली शिंदे, प्रो. राहुल वाकड़े, डॉ. प्रेरणा रामटेके, प्रो. वैष्णवी कुलकर्णी और प्रो. अंजलि साल्वे ने आयोजन की रूपरेखा से लेकर संचालन तक सक्रिय भूमिका निभाई।
वहीं परीक्षक के रूप में डॉ. प्रवीण कोकणे, डॉ. प्रियदर्शन भवरे और डॉ. रवींद्र भोरे ने अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।
छात्रों के लिए प्रेरणादायी आयोजन
अनुशासन, रचनात्मकता और उत्साह के साथ संपन्न हुआ यह कार्यक्रम छात्रों के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ। महाविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस प्रकार के नवाचारपूर्ण और व्यावहारिक शिक्षण से जुड़े कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प व्यक्त किया।
‘आनंदनगरी’ न केवल मनोरंजन का माध्यम रही, बल्कि छात्रों के व्यक्तित्व विकास और भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।


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