महाराष्ट्र में तीन-भाषा नीति खत्म: अब नई भाषा नीति तय करेगी समिति
मुंबई, जून 2025।
महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए प्राथमिक कक्षाओं में लागू तीन-भाषा नीति को समाप्त करने का ऐलान किया है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को इसकी घोषणा की और बताया कि अब एक नई उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है जो नई भाषा शिक्षा प्रणाली पर सिफारिशें देगी।
राज्य सरकार ने इस निर्णय के तहत पहले से लागू तीन-भाषा नीति पर आधारित सभी सरकारी आदेश (GRs) को रद्द कर दिया है।
🔍 तीन-भाषा नीति क्या थी?
इस नीति के अंतर्गत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ाई जाती थीं:
- मातृभाषा / क्षेत्रीय भाषा (जैसे मराठी)
- हिंदी
- अंग्रेज़ी
हालांकि, कई निजी और अल्पसंख्यक स्कूलों में इसके क्रियान्वयन को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ था।
🗣️ फडणवीस ने क्या कहा?
“हमने तीन-भाषा नीति पर आधारित सभी पुराने जीआर रद्द कर दिए हैं। एक विशेष समिति बनाई गई है, जो नई शिक्षा नीति और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर राज्य में भाषा प्रणाली को लेकर सिफारिशें देगी।”
🧠 नई समिति की जिम्मेदारियाँ:
- राज्य में भाषा शिक्षा का व्यावहारिक प्रारूप सुझाना
- मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेज़ी के बीच संतुलन बनाना
- NEP 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रस्ताव देना
- निजी व अल्पसंख्यक संस्थानों की चुनौतियों पर ध्यान देना
📚 बदलाव के संभावित फायदे:
- छात्रों पर भाषाओं का बोझ कम होगा
- स्कूलों को अधिक लचीलापन मिलेगा
- शिक्षा व्यवस्था अधिक समावेशी और स्पष्ट होगी
- मराठी और अन्य भाषाओं के बीच संतुलन बनेगा
⚖️ विवाद और पृष्ठभूमि:
तीन-भाषा नीति को लेकर स्कूलों और संगठनों में मतभेद रहे हैं:
- तीसरी भाषा लागू करने में तकनीकी दिक्कतें
- मराठी की अनदेखी पर भाषा संगठनों की चिंता
- अल्पसंख्यक संस्थानों में मातृभाषा बनाम राज्य भाषा का असमंजस
📌 निष्कर्ष:
- तीन-भाषा नीति रद्द
- नई समिति गठित
- भविष्य की भाषा नीति पर होगी पुनर्विचार
- शिक्षा नीति में लचीलापन और स्पष्ट दिशा का संकेत
अब सभी की नजरें उस समिति की सिफारिशों पर होंगी, जो महाराष्ट्र में भाषा शिक्षा का भविष्य तय करेगी।

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