आज़ादी की जंग में मुसलमानों की कुर्बानियों को कोई मिटा नहीं सकता

मौलाना गुलाम जिलानी मिसबाही की प्रेरक वाणी के साथ दारुल उलूम रजविया लतीफिया में रंगीन जश्न

जालना
15 अगस्त 2025
शिक्षा · धर्म · जनसम्पर्क
खरपुडी रोड, दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहउल उलूम

खरपुडी रोड स्थित दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहउल उलूम का प्रांगण आज़ादी के रंग में सराबोर नजर आया। जश्ने आज़ादी के इस यादगार मौके की सरपरस्ती मदरसे के मोहतमिम मौलाना गुलाम जिलानी मिसबाही ने की और अपने जोशीले व प्रेरणादायक वक्तव्य से मौजूद लोगों में नया जोश भर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत छात्रों मोहम्मद नासिर और मोहम्मद अरमान द्वारा पेश किए गए “तराना-ए-हिंद” से हुई, जिसने पूरे माहौल को हुब्बुल वतन की भावना से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर शिक्षक हाफिज रिजवान, हाफिज फैयाज और हाफिज मुबारक समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

संस्था परिसर में तिरंगा लहराने के साथ ही वतनपरस्ती के नारे गूंज उठे और सभी ने मिलकर आजादी के शहीदों को याद किया।

“भारत की आज़ादी की लड़ाई में मुसलमानों की कुर्बानियां किसी से छिपी नहीं हैं। बहादुर शाह ज़फ़र से लेकर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और हजारों उलेमा-ए-हिंद ने अपने खून से आज़ादी की कहानी लिखी। आज़ादी हासिल करना पहला मक़सद था, और अब इस मुल्क की तरक्की में अपना किरदार अदा करना हमारी जिम्मेदारी है। मुसलमानों को शिक्षा, व्यापार, विज्ञान और समाज सेवा के हर क्षेत्र में आगे बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, ताकि हिंदुस्तान दुनियाभर में तरक्की और अमन का पैगाम दे सके।”

मौलाना गुलाम जिलानी मिसबाही ने कहा कि आज का दिन हमें सिर्फ शहीदों की कुर्बानी याद दिलाने के लिए नहीं है, बल्कि यह अहसास कराता है कि भारत का हर नागरिक मिलजुलकर इस वतन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाए।

मुख्य उपस्थित

हाफिज रिजवान · हाफिज फैयाज · हाफिज मुबारक · छात्र प्रतिनिधि: मोहम्मद नासिर, मोहम्मद अरमान

आयोजन की झलक

तराना-ए-हिंद, तिरंगा फहराना, शहीदों को श्रद्धांजलि एवं प्रेरक भाषण।

सम्पर्क: दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहउल उलूम, खरपुडी रोड, जालना