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बंद क्रेडिट कार्ड पर बैंक की 33 लाख रुपये की मांग: उपभोक्ता मामला

credit card closed but demand 33 lakh
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credit card closed but demand 33 lakh

जालना/कर्नाटक:
क्रेडिट कार्ड खाता बंद होने के बावजूद ग्राहक से 33.83 लाख रुपये की मांग करने और लगातार मानसिक उत्पीड़न करने के मामले में कर्नाटक राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने बैंक को भारी मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसे उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है।credit card closed but demand 33 lakh.

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क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता वी. वी. वेंकटेश बाबू ने 27 अगस्त 2010 को 15,500 रुपये का भुगतान कर अपना क्रेडिट कार्ड खाता बंद कर दिया था। उन्होंने बैंक से इसकी लिखित पुष्टि (रसीद) भी प्राप्त की थी।

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि करीब 7 साल बाद, वर्ष 2018 में बैंक ने उन्हें 33,83,173 रुपये की मांग का नोटिस भेज दिया। इसके बाद लगातार फोन कॉल, मैसेज और कानूनी नोटिस के जरिए वसूली का दबाव बनाया गया।

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मानसिक उत्पीड़न और सिबिल स्कोर पर असर

लगातार हो रही इस कार्रवाई से वेंकटेश बाबू को मानसिक तनाव झेलना पड़ा। इतना ही नहीं, उनके CIBIL स्कोर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिससे उनकी वित्तीय विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

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जिला आयोग से राज्य आयोग तक पहुंचा मामला

पीड़ित ने पहले जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जहां बैंक को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

हालांकि, इसे अपर्याप्त मानते हुए उन्होंने राज्य आयोग में अपील की।


राज्य आयोग का सख्त फैसला

राज्य आयोग ने सभी दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद कहा कि:

  • खाता बंद होने के बावजूद वसूली करना
  • वर्षों तक ग्राहक को परेशान करना
  • सिबिल स्कोर को प्रभावित करना

👉 ये सभी अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) के अंतर्गत आते हैं।

आयोग के आदेश:

  • 5 लाख रुपये मुआवजा
  • 1 लाख रुपये वकील फीस
  • 50 हजार रुपये शिकायत खर्च
  • 30 दिनों में भुगतान अनिवार्य
  • देरी होने पर 9% वार्षिक ब्याज लागू

उपभोक्ता संगठन ने बताया बड़ी जीत

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, जालना के सचिव एडवोकेट महेश धन्नावत ने इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी जीत बताया।

उन्होंने कहा कि बैंक और वित्तीय संस्थानों को अपने ग्राहकों के साथ जिम्मेदारी और पारदर्शिता से व्यवहार करना चाहिए। वर्षों पुराने बंद खाते पर इस तरह की मांग पूरी तरह गैरकानूनी है।

संगठन के अध्यक्ष डॉ. तारगे, उपाध्यक्ष एडवोकेट वसीम शेख, वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट डी. पी. पाटिल और एडवोकेट मधुकर सोनवणे ने भी फैसले का स्वागत किया।


क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह निर्णय उन सभी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो बैंक या वित्तीय संस्थानों की गलत नीतियों का शिकार होते हैं।

✔ यह केस बताता है कि

  • ग्राहक अपने अधिकारों के लिए लड़ सकता है
  • न्यायिक प्रणाली उपभोक्ताओं के पक्ष में खड़ी है
  • गलत बैंकिंग प्रथाओं पर सख्त कार्रवाई हो सकती है

निष्कर्ष

यह फैसला न सिर्फ पीड़ित ग्राहक के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि पूरे देश के उपभोक्ताओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर न्याय जरूर मिलता है।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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