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जालना बनेगा ग्रीन स्टील क्रांति का केंद्र — पर्यावरण के अनुकूल स्टील उत्पादन की ऐतिहासिक शुरुआत

जालना बनेगा ‘ग्रीन स्टील क्रांति’ का केंद्र — पर्यावरण के अनुकूल स्टील निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक पहल

🗓️ दिनांक: 30 मई 2025 | 📍 स्थान: जालना

‘ग्रीन स्टील कॉन्फ्रेंस 2025’ में देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

🔍 फोकस: टिकाऊ उत्पादन, शून्य कार्बन उत्सर्जन, पर्यावरण-संवेदनशील स्टील निर्माण

महाराष्ट्र का जालना शहर, जो पहले से ही अपनी औद्योगिक पहचान और व्यापारिक क्षमताओं के लिए प्रसिद्ध है, अब ‘ग्रीन स्टील क्रांति’ की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल कर रहा है। जैसे बीज उद्योग में स्वर्गीय बद्रीनारायण बारवाले ने हायब्रिड बीज और बीटी कपास से हरित क्रांति की नींव रखी थी, वैसे ही जालना के स्टील उद्योगपति अब पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन की ओर अग्रसर हैं।

30 मई को आयोजित ‘ग्रीन स्टील कॉन्फ्रेंस 2025’ में इस आंदोलन की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। यह सम्मेलन AIIFA (All India Induction Furnace Association), NISST (National Institute of Secondary Steel Technology), SMM और जालना स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य था Zero Carbon Emission को लक्षित कर पर्यावरण-संवेदनशील स्टील उत्पादन को बढ़ावा देना।

🔹 प्रमुख उपस्थित नाम और वक्ता:

  • डॉ. स्वारेन (इलेकोथर्म कंपनी)
  • घनश्यामदास गोयल (कालिका स्टील)
  • परमजीत सिंह (निदेशक, NISST)
  • गौरव सोमवंशी
  • सुप्रिया बंसल
  • योगेश मानधनी
  • अनिल गोयल
  • विशाल अग्रवाल (भाग्यलक्ष्मी स्टील)
  • पीयूष मूंदड़ा
  • यशराज पित्ती
  • उमेश राठी
  • द्वीज काबरा
  • सानिका अग्रवाल
  • कौस्तुभ लोया (राजुरी स्टील)
  • गजानन बाविस्कर (गिरीटेक)
  • अतुल परमार
  • विकास गौड़

🛠️ प्रमुख बिंदु और सुझाव:

नितिन काबरा (निदेशक, भाग्यलक्ष्मी स्टील) ने बताया कि जालना का स्टील उद्योग हर महीने ₹300 करोड़ की बिजली खपत करता है और पूरी तरह से महावितरण पर निर्भर है। उन्होंने गुजरात की तर्ज पर CNG पाइपलाइन सुविधा की मांग की, जिससे लागत और प्रदूषण दोनों में कमी संभव है। उन्होंने केंद्र सरकार से सब्सिडी और तकनीकी सहायता की भी मांग की।

परमजीत सिंह (NISST) ने तकनीकी मानकों पर विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया और स्थानीय उद्यमियों से NISST में रजिस्ट्रेशन करने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे केंद्र सरकार के सहयोग से उद्योग की समस्याओं का समाधान निकालेंगे।

योगेश मानधनी ने बताया कि जालना का उद्योग “स्टील से स्टील” यानी स्क्रैप से रीसायकल स्टील निर्माण की दिशा में काम कर रहा है — जो पर्यावरण की दृष्टि से बहुत टिकाऊ है। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि ‘SteelEx 2025’ नामक प्रदर्शनी जालना में आयोजित की जाएगी, जिसका लोगो व संकल्पना इसी कॉन्फ्रेंस में जारी की गई।

📢 निष्कर्ष और समापन:

वक्ताओं ने विश्वास जताया कि जैसे हरित क्रांति ने कृषि क्षेत्र में बदलाव लाया, वैसे ही ‘ग्रीन स्टील क्रांति’ जालना से शुरू होकर पूरे भारत के स्टील उद्योग को नया रास्ता दिखाएगी।

कार्यक्रम की शुरुआत अनुज बंसल (कालिका स्टील) की प्रस्तावना से हुई और अंत में कौस्तुभ लोया (राजुरी स्टील) ने आभार प्रदर्शन किया।

निष्कर्ष: अगर केंद्र सरकार की नीति और स्थानीय उद्यमियों की नवाचार भावना साथ मिलती है, तो जालना भारत का पहला ‘ग्रीन स्टील मॉडल हब’ बनने की ओर तेज़ी से बढ़ सकता है।

© http://www.newsnationonline.com | जालना न्यूज़ विशेष


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Imran Siddiqui

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