नई दिल्ली: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताज़ा रिपोर्ट के बाद चीन के सोना बाजार में आए परिवर्तनों ने वैश्विक सोना बाजार में हलचल पैदा कर दी है। 15 अगस्त 2025 को भारत में सोने के दामों में हल्की गिरावट देखी गई — नीचे विस्तृत रेट और विश्लेषण दिया गया है।
आज का सोना रेट — 15 अगस्त 2025 (भारत)
नोट: स्थानीय शोरूम/सरकारी चार्जेज और ग्राम/10 ग्राम के आधार पर कीमतें भिन्न हो सकती हैं।
| बाज़ार / शहर | 24 कैरेट (₹ / 10 ग्राम) | 22 कैरेट (₹ / 10 ग्राम) | परिवर्तन (कल की तुलना) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹ 1,01,240 | ₹ 92,800 | ≈ –₹ 110 |
| मुंबई | ₹ 1,01,240 | ₹ 92,800 | ≈ –₹ 110 |
| कोलकाता | ₹ 1,01,240 | ₹ 92,800 | ≈ –₹ 110 |
| चेन्नई | ₹ 1,01,750 | ₹ 93,300 | ≈ –₹ 110 |
अंतरराष्ट्रीय सोना भाव (LBMA / Spot)
| सूचक | दर | टिप्पणी |
|---|---|---|
| LBMA (USD / ट्रॉय औंस) | $2,446.80 | +0.3% (AM/PM सत्र के संदर्भ में) |
| Spot (USD / ग्राम) | ≈ 8.07 | स्थानीय विनिमय और प्रीमियम अलग लागू होंगे |
मुख्य बिंदु — WGC रिपोर्ट और चीन का प्रभाव
- WGC के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार चीन के सोने के आयात, निवेश और उपभोग में हालिया बदलाव वैश्विक मांग-आपूर्ति संतुलन पर असर डाल रहे हैं।
- जुलाई 2025 में LBMA रेट में हल्की वृद्धि और शंघाई बेंचमार्क रेट में 0.5% उछाल दर्ज हुआ; RMB में साल की शुरुआत से सोने का भाव ~22% ऊपर है।
- चीन के गोल्ड ETF होल्डिंग्स में गिरावट (तीन टन के करीब कमी) और कुल आयात में कमी (जून में लगभग 50 टन) इसके संकेत हैं कि कुछ निवेशक इक्विटी की ओर लौट रहे हैं।
सोना आयात और ETF ट्रेंड
2025 की पहली छमाही में चीन का कुल आयात लगभग 323 टन रहा — जो पिछले वर्ष की समान अवधि से कम है। आर्थिक संकेतक और शेयर बाज़ार की मजबूती के कारण कुछ निवेशक गोल्ड ETF से इक्विटी में शिफ्ट कर रहे हैं। हंगामी मांग (त्योहार/विवाह मौसम) आने वाले महीनों में आभूषणों की मांग बढ़ा सकती है, पर ऊंची कीमतें खपत को सीमित कर सकती हैं।
भारत पर प्रभाव और निवेशकों के लिए सुझाव
विशेषज्ञों का अनुमान है कि चीन की कुल मांग में कमी अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति-दबाव बना सकती है और इससे भारत में भाव स्थिर या नरम रह सकते हैं। निवेशकों के लिए कुछ सुझाव:
- यदि आपका लक्ष्य लंबी अवधि निवेश है — सोना अभी भी पोर्टफोलियो हेज के रूप में उपयोगी हो सकता है।
- अल्पकालिक ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को वैश्विक संकेतकों, डॉलर की दिशा और चीनी आयात आँकड़ों पर नज़र रखनी चाहिए।
- दिपक/बिक्री के समय स्थानीय चार्जेज (making charges, GST) और शोरूम-प्रेमियम को ध्यान में रखें।

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