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ब्लिंकिट-ज़ोमैटो खुले, स्थानीय दुकानों पर रोक क्यों? जालना में विवाद

blinkit zomato vs local shops

ब्लिंकिट-ज़ोमैटो देर रात तक खुले, लेकिन स्थानीय दुकानों पर रोक क्यों? – एड. महेश धन्नावत का सवाल

जालना | विशेष रिपोर्ट (NewsNationOnline.com):
: blinkit zomato vs local shopsएक ओर Blinkit और Zomato जैसी ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं देर रात तक सक्रिय रहती हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय दुकानदारों और होटल व्यवसायियों को पुलिस प्रशासन द्वारा रात 10–11 बजे के बीच दुकानें बंद करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश धन्नावत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे छोटे व्यापारियों के साथ अन्याय बताया है।


स्थानीय व्यापारियों के साथ भेदभाव का आरोप

एड. महेश धन्नावत का कहना है कि एक तरफ बड़ी ऑनलाइन कंपनियों को रात देर तक व्यवसाय करने की खुली छूट है, जबकि छोटे दुकानदारों, होटल संचालकों और फुटपाथ विक्रेताओं पर सख्ती की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को राज्य सरकार की नीतियों का पालन करते हुए सभी व्यापारियों के लिए समान नियम लागू करने चाहिए।

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कानून क्या कहता है?

एड. धन्नावत ने Maharashtra Shops and Establishments Act 2017 का हवाला देते हुए बताया कि इस कानून के तहत बार और शराब दुकानों को छोड़कर अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे तक संचालित करने की अनुमति दी गई है।

इसके अलावा, Accelerate Products Ventures Pvt. Ltd. vs State of Maharashtra मामले में Bombay High Court ने स्पष्ट किया है कि केवल कानून-व्यवस्था का हवाला देकर पुलिस दुकानों को जबरन बंद नहीं करवा सकती।
अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि 24 घंटे
दुकानों के संचालन से:

  • उपभोक्ताओं को सुविधा मिलती है
  • आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं

👉 आधिकारिक जानकारी:
🔗 https://mahakamgar.maharashtra.gov.in
🔗 https://bombayhighcourt.nic.in

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रोजगार और आम जनता पर असर

एड. धन्नावत ने बताया कि जालना में बड़ी संख्या में छात्र “कमाओ और सीखो” योजना के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। यदि होटल, कैफे और दुकानें देर रात तक खुली रहेंगी, तो इन छात्रों को पार्ट-टाइम रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

साथ ही, कई नौकरीपेशा लोग रात 8:30 या 9:30 बजे के बाद घर लौटते हैं। ऐसे में यदि बाजार और होटल देर रात तक खुले रहें, तो उन्हें भोजन और आवश्यक सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं।


ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन कारोबार – बढ़ती असमानता

एड. धन्नावत ने आरोप लगाया कि बड़ी होटल चेन, क्लाउड किचन और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म देर रात तक बिना किसी रोक-टोक के सेवाएं देते हैं, जबकि स्थानीय दुकानदारों को सख्ती का सामना करना पड़ता है।
इससे छोटे व्यापारियों के व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है और बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन रही है।


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प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग

एड. धन्नावत ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दें कि:

  • सरकार के नियमों का समान रूप से पालन हो
  • स्थानीय व्यापारियों को संरक्षण मिले
  • छोटे व्यवसायों के हितों की रक्षा की जाए

निष्कर्ष

ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों और स्थानीय दुकानदारों के बीच नियमों की असमानता अब एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। यदि राज्य सरकार के कानूनों और न्यायालय के आदेशों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो इससे न केवल छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी बल्कि आम नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


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