Gold Rate Crash Warning: India में सोना ₹1 लाख से नीचे फिसल सकता है, COMEX Gold $3,000/oz तक गिरने की आशंका
नई दिल्ली | वेब डेस्क
Gold Rate Today in India को लेकर निवेशकों और ज्वैलरी मार्केट में हलचल तेज हो गई है। 2025 में ऐतिहासिक तेजी दिखाने के बाद 2026 की शुरुआत में ही सोने की कीमतों में तेज करेक्शन देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना जहां ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंचा था, वहीं अब यह करीब ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर आ चुका है। यानी महज कुछ हफ्तों में लगभग ₹24,500 (करीब 13.5%) की गिरावट। Gold Price Crash in India
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो COMEX पर गोल्ड फ्यूचर्स $5,046 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहे हैं, जो अपने ऑल-टाइम हाई $5,626.80/oz से करीब 10.5% नीचे हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह रूस के US Dollar आधारित ट्रेड सेटलमेंट में संभावित वापसी और इससे जुड़े जियोपॉलिटिकल संकेत हैं, जो BRICS देशों की De-dollarisation रणनीति को कमजोर कर सकते हैं।
रूस की डॉलर में वापसी क्यों अहम मानी जा रही है?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, Russia अमेरिका के साथ संभावित आर्थिक साझेदारी पर विचार कर रहा है, जिसमें व्यापार का भुगतान फिर से US Dollar में किया जा सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के संभावित समाधान और अमेरिका के साथ रिश्तों में नरमी के संकेतों के बीच सामने आया है।
PACE 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट Amit Goel का कहना है कि अगर इस रिपोर्ट पर मॉस्को की ओर से कोई आधिकारिक खंडन नहीं आता, तो यह सोने की वैश्विक मांग-सप्लाई संरचना में बड़ा बदलाव ला सकता है।
“BRICS देश डॉलर के विकल्प के तौर पर गोल्ड जमा कर रहे थे। रूस का डॉलर में लौटना इस रणनीति को झटका देगा, जिससे सोने की मांग पर सीधा असर पड़ेगा।”

BRICS देशों की गोल्ड रणनीति और कीमतों में उछाल
BRICS (Brazil, Russia, India, China, South Africa) देशों ने पिछले कुछ वर्षों में डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए सोने की भारी खरीदारी की।
SEBI-रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट Anuj Gupta बताते हैं कि:
- 2020 से 2024 के बीच BRICS सेंट्रल बैंकों ने दुनिया के 50% से अधिक गोल्ड रिज़र्व की खरीद की
- चीन और रूस सबसे बड़े उत्पादक और खरीदार रहे
- 2024 में चीन ने करीब 380 टन और रूस ने 340 टन गोल्ड का उत्पादन किया
- सितंबर 2025 में ब्राज़ील ने 2021 के बाद पहली बार 16 टन गोल्ड खरीदा
इस आक्रामक रणनीति ने वैश्विक बाजार में सप्लाई को टाइट किया, जिससे सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी आई।
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क्या सेंट्रल बैंक अब सोना बेच सकते हैं?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जियोपॉलिटिकल माहौल बदला और डॉलर फिर मजबूत हुआ, तो सेंट्रल बैंक गोल्ड खरीद रोक सकते हैं या बिक्री शुरू कर सकते हैं।
Anuj Gupta के अनुसार,
“अगर सेंट्रल बैंकों की खरीदारी रुकी या वे ओपन मार्केट में सोना बेचने लगे, तो ओवरसप्लाई की स्थिति बनेगी, जिससे कीमतों पर भारी दबाव आएगा।”
साथ ही, अमेरिका में बढ़ती महंगाई के चलते US Fed के ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर हो रही हैं, जो गोल्ड के लिए निगेटिव संकेत माना जाता है।

Gold Price Outlook: आगे क्या?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक:
- India Gold Price: ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम से नीचे जाने की आशंका
- COMEX Gold: $3,000/oz तक गिरावट (2027 के अंत तक)
हालांकि यह गिरावट एक बार में नहीं होगी। बीच-बीच में हल्की रिकवरी यानी “Dead Cat Bounce” देखने को मिल सकती है, लेकिन ओवरऑल ट्रेंड कमजोर रह सकता है।
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निवेशकों के लिए सलाह
- शॉर्ट टर्म में गोल्ड में वोलैटिलिटी ज्यादा रह सकती है
- सेंट्रल बैंकों की पॉलिसी और डॉलर इंडेक्स पर नजर रखें
- लॉन्ग टर्म निवेश से पहले करेक्शन का इंतजार बेहतर हो सकता है
निष्कर्ष:
अगर रूस वास्तव में डॉलर आधारित ट्रेड सिस्टम में लौटता है और BRICS की de-dollarisation रणनीति कमजोर पड़ती है, तो सोने की मौजूदा तेजी लंबी मंदी में बदल सकती है। ऐसे में निवेशकों को भावनाओं के बजाय डेटा और वैश्विक संकेतों के आधार पर फैसले लेने चाहिए।
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