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ट्रंप की टैरिफ नीति से वैश्विक वित्तीय प्रणाली हिल गई: $5 ट्रिलियन की पूंजी बाजार से गायब, मंदी की आहट हर कोने में

ट्रंप की टैरिफ नीति से वैश्विक वित्तीय प्रणाली हिल गई: $5 ट्रिलियन की पूंजी बाजार से गायब, मंदी की आहट हर कोने में


भूमिका:

2025 का यह सप्ताह वैश्विक अर्थव्यवस्था के इतिहास में दर्ज हो गया है। ट्रंप प्रशासन द्वारा अचानक और अत्यधिक टैरिफ वृद्धि के बाद चीन की आक्रामक प्रतिक्रिया ने वित्तीय बाजारों को हिला दिया। केवल दो दिनों में अमेरिकी बाज़ार से $5 ट्रिलियन पूंजी मिट गई।

अमेरिका की टैरिफ नीति: सौ वर्षों की सबसे बड़ी कर कार्रवाई

ट्रंप प्रशासन ने चीन से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ 25% से बढ़ाकर 40% कर दिए। यह नीति 1968 के बाद की सबसे बड़ी अप्रत्यक्ष कर वृद्धि मानी जा रही है। इसका मकसद घरेलू उद्योग को बचाना बताया गया है।

चीन का जबाबी हमला: 34% का आयात शुल्क

चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर औसतन 34% तक का नया शुल्क लगाया, जिससे वैश्विक व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। कृषि, ऊर्जा, मोटर वाहन और तकनीकी सामान इस दायरे में हैं।

अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट

  • S&P 500: दो दिन में 6% गिरा, $5 ट्रिलियन का नुकसान
  • NASDAQ: 20% गिरकर ‘बेयर मार्केट’ में
  • Dow Jones: 2200 अंकों की गिरावट
  • Magnificent Seven ETF: सात हफ्तों की लगातार गिरावट

VIX ‘डर सूचकांक’ 5 वर्षों में सबसे ऊँचे स्तर पर पहुंच चुका है।

फेडरल रिजर्व की नीति: दुविधा में निर्णय

ब्याज दर घटाने की उम्मीदों को झटका मिला जब फेड चेयर पॉवेल ने ‘रुको और देखो’ नीति को दोहराया। इससे बाजारों में और भी चिंता बढ़ गई। अब जून से चार बार दर कटौती की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

तेल और कमोडिटी बाजार की गिरावट

तेल की कीमतें $62 प्रति बैरल तक गिर गईं – 4 सालों में सबसे नीचे। ऊर्जा, धातु और खाद्य सामग्रियों के दामों में दबाव बढ़ा है।

अन्य वैश्विक असर

  • यूरोप: 1% GDP गिरावट की आशंका
  • चीन: पहले से कमजोर ग्रोथ को और झटका
  • स्विट्ज़रलैंड: बॉन्ड यील्ड निगेटिव में
  • भारत: तेल और डॉलर से ट्रेड घाटे की चुनौती

विश्लेषकों की राय

जेपी मॉर्गन और बार्कलेज के अनुसार, अब मंदी की आशंका बहुत प्रबल हो चुकी है। अमेरिका की Q4 GDP में गिरावट तय मानी जा रही है, और मुद्रास्फीति 4% से ऊपर जा सकती है।

सोमवार की आशंकाएं

बाजार सोमवार को और गिर सकते हैं अगर सरकारें और केंद्रीय बैंक समय रहते हस्तक्षेप नहीं करते।

निष्कर्ष:

यह संकट किसी बाहरी आपदा से नहीं, बल्कि आर्थिक नीतियों से उपजा है। दुनिया को अब मिलकर जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, वरना यह संकट 2008 से भी बड़ा हो सकता है।





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Imran Siddiqui

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