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आखिर 750ml की ही क्यों होती है वाइन की बोतल? जानिए इसके पीछे छिपा इतिहास और विज्ञान

आखिर 750ml की ही क्यों होती है वाइन की बोतल? जानिए इसके पीछे छिपा इतिहास और विज्ञान

अगर आपने कभी वाइन की बोतल खरीदी या देखी होगी, तो एक बात जरूर नोट की होगी कि अधिकांश वाइन 750 मिलीलीटर (ml) की बोतल में ही मिलती है। यह सिर्फ एक संयोग नहीं, बल्कि इसके पीछे इतिहास, व्यापार और तकनीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण कारण हैं। माना जाता है कि पुराने समय में फ्रांस और ब्रिटेन के बीच वाइन का बड़ा व्यापार होता था। उस दौर में फ्रांस लीटर प्रणाली का उपयोग करता था, जबकि ब्रिटेन की माप प्रणाली अलग थी। 750ml का आकार दोनों देशों के लिए व्यापार और हिसाब-किताब को आसान बनाता था। धीरे-धीरे यही आकार पूरी दुनिया में स्टैंडर्ड बन गया।

कांच बनाने की तकनीक और 6 गिलास की थ्योरी

एक लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि पुराने समय में कांच की बोतलें मशीनों से नहीं, बल्कि कारीगरों द्वारा हाथ से बनाई जाती थीं। कारीगर एक बार में जितनी हवा फूंक पाते थे, उससे लगभग 750ml क्षमता वाली बोतल तैयार होती थी। इसके अलावा 750ml की एक बोतल से लगभग छह गिलास वाइन निकलती है, जो परिवार या दोस्तों के साथ भोजन के दौरान साझा करने के लिए आदर्श मात्रा मानी जाती थी। यही कारण है कि यह आकार धीरे-धीरे सबसे लोकप्रिय बन गया।

वाइन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में भी मददगार

विशेषज्ञों के अनुसार 750ml की बोतल वाइन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भी उपयुक्त होती है। वाइन की बोतल को कॉर्क से बंद किया जाता है और उसके अंदर थोड़ी मात्रा में हवा मौजूद रहती है। 750ml क्षमता में वाइन और हवा का संतुलन ऐसा रहता है कि वाइन धीरे-धीरे परिपक्व होती है और उसका स्वाद लंबे समय तक बेहतर बना रहता है। साथ ही यह बोतल आकार में इतनी बड़ी भी नहीं होती कि संभालना मुश्किल हो और इतनी छोटी भी नहीं कि कम मात्रा लगे। इसलिए इसे स्टोर करना, पैक करना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान होता है।

वाइन की बोतल हरे या भूरे रंग की क्यों होती है?

वाइन की बोतलों का गहरा हरा या भूरा रंग भी एक खास वजह से चुना जाता है। शुरुआत में कांच बनाने की तकनीक सीमित होने के कारण बोतलों का रंग स्वाभाविक रूप से गहरा होता था। बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि सूर्य की तेज रोशनी और अल्ट्रावायलेट किरणें वाइन के स्वाद और गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाती हैं। गहरे रंग की बोतलें रोशनी को काफी हद तक रोकती हैं, जिससे वाइन लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि आज भी दुनिया की अधिकांश वाइन कंपनियां 750ml की गहरे रंग की बोतलों का ही उपयोग करती हैं।


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