Stock Market Today: वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, जहां बीएसई सेंसेक्स 364 अंक टूटकर 77,816 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 139 अंकों की कमजोरी के साथ 24,259 पर कारोबार शुरू करता नजर आया। निवेशकों में बढ़ी सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के चलते शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव बना रहा।
आईटी शेयरों ने संभाला मोर्चा, ट्रेंट में सबसे बड़ी गिरावट
बाजार में गिरावट के बावजूद आईटी सेक्टर ने मजबूती दिखाई। इन्फोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए और टॉप गेनर्स की सूची में शामिल रहे। दूसरी ओर ट्रेंट लिमिटेड के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और इसमें करीब 12.44 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली। इसके अलावा अडानी एंटरप्राइजेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे बाजार की धारणा कमजोर रही।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेत
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर केवल भारत ही नहीं बल्कि एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 करीब 0.90 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.72 प्रतिशत, हांगकांग का हैंगसेंग 0.51 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.26 प्रतिशत तक नीचे कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिका में भी पिछले कारोबारी सत्र में प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। डॉव जोंस 130 अंक, एसएंडपी 500 0.45 प्रतिशत और नैस्डैक 1.16 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी बिकवाली और ईरान पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
कच्चे तेल में तेज उछाल, निवेशकों की बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 76.04 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि WTI क्रूड भी 72.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। पिछले दो दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। वहीं यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) भी 100.89 के स्तर पर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर भारतीय बाजार और महंगाई दोनों पर देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है।
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