भारतीय शेयर बाजार ने एक दिन की गिरावट के बाद दमदार वापसी करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत किया है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। अमेरिकी आर्थिक संकेतकों, रूस से जुड़े प्रस्तावित प्रतिबंधों में संभावित बदलाव और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने बाजार की धारणा को मजबूती दी।
किन वजहों से लौटी बाजार में तेजी?
बाजार की तेजी के पीछे कई सकारात्मक संकेत रहे। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े अनुमान से कम रहने से निवेशकों को उम्मीद जगी कि वैश्विक वित्तीय माहौल अपेक्षाकृत स्थिर रह सकता है। इसके अलावा अमेरिकी संसद में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित टैरिफ को कम करने की चर्चा ने भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ाई। वहीं भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुए मुक्त व्यापार समझौते से निर्यात बढ़ने की संभावना ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।
सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल
कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 500 अंकों से अधिक की तेजी दर्ज की गई और यह 77,600 के करीब पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की बढ़त के साथ 24,200 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद आई इस तेजी ने बाजार की धारणा को फिर सकारात्मक दिशा दी।
इन सेक्टरों और शेयरों ने संभाला बाजार
बाजार की मजबूती में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों का अहम योगदान रहा। एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल, इंडिगो और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी सेक्टर दबाव में रहा, जहां टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और इंफोसिस जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों की संपत्ति में बड़ा इजाफा
बाजार में आई तेजी का सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को हुआ। शुरुआती कारोबार के दौरान ही बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 3.9 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। यानी कुछ ही मिनटों में निवेशकों की संपत्ति में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का इजाफा देखने को मिला। यह उछाल इस बात का संकेत है कि सकारात्मक वैश्विक और घरेलू संकेत मिलने पर बाजार कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देता है।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेत मजबूत बने रहते हैं, तो बाजार में सकारात्मक रुख जारी रह सकता है। हालांकि निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच सोच-समझकर और अपने जोखिम प्रोफाइल के अनुसार निवेश करना चाहिए।
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