⚖️ महाराष्ट्र में भी अपराध को महिमामंडित करने वाली फिल्मों पर सख्ती की मांग: एड. महेश धन्नावत
जालना/नई दिल्ली: गैंगस्टर लॉरेन्स बिश्नोई के जीवन पर आधारित विवादित वेब सीरीज़ ‘लॉरेन्स ऑफ पंजाब’ को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका को केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद बंद कर दिया गया है। केंद्र ने ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 को इस सीरीज़ को प्रसारित न करने की सलाह दी, जिसके बाद अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया।
📌 केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद रुका प्रसारण
मुख्य न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति प्रमोद गोयल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पंजाब सरकार ने 22 अप्रैल को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर इस वेब सीरीज़ और उसके ट्रेलर पर रोक लगाने की मांग की थी।
👉 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के लिए देखें: https://mib.gov.in
अदालत ने माना कि केंद्र ने इस पर गंभीरता से कदम उठाया और संबंधित प्लेटफॉर्म को सलाह जारी की।
⚠️ सार्वजनिक व्यवस्था और युवाओं पर असर की चिंता
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने अदालत को बताया कि पंजाब पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार इस वेब सीरीज़ से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और अपराध को बढ़ावा मिलने का खतरा है।
पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी किसी भी सामग्री के खिलाफ है, जो अपराध को महिमामंडित कर युवाओं को गुमराह करती है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने अब तक 2,600 से अधिक आपत्तिजनक ऑनलाइन लिंक ब्लॉक किए हैं, जिसकी अदालत ने सराहना की।
🧾 सांसद ने दायर की थी जनहित याचिका
यह जनहित याचिका लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने अधिवक्ता निखिल घई के माध्यम से दायर की थी।
याचिका में कहा गया था कि यह वेब सीरीज़ एक कुख्यात अपराधी के जीवन को महिमामंडित करती है, जिससे युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और समाज में असंतुलन पैदा हो सकता है।
🎬 महाराष्ट्र में भी उठी सख्ती की मांग
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष महेश एस. धन्नावत ने कहा कि पंजाब सरकार और न्यायालय का यह कदम सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि पुष्पा जैसी फिल्मों में अपराध का महिमामंडन किया जाता है और उन्हें पुरस्कार भी मिलते हैं, जो समाज के लिए गलत संदेश देता है।
उन्होंने मांग की कि महाराष्ट्र सरकार को भी धुरंधर जैसी हिंसक फिल्मों और वेब कंटेंट पर नियंत्रण करना चाहिए।
🌐 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण जरूरी
एड. धन्नावत ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए अपराध से जुड़ी सामग्री तेजी से युवाओं तक पहुंच रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पंजाब की तरह महाराष्ट्र साइबर विभाग को भी सक्रिय होकर आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
👉 साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन शिकायतों के लिए देखें: https://cybercrime.gov.in
🔗 Internal Links (WordPress के लिए)
- 👉 /crime-news-india
- 👉 /maharashtra-news
- 👉 /ott-platform-regulation
- 👉 /social-issues-india
👉 और पढ़ें: NewsNationOnline पर ऐसी ही अन्य खबरें
🔍 निष्कर्ष
‘लॉरेन्स ऑफ पंजाब’ वेब सीरीज़ पर रोक ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मनोरंजन के नाम पर अपराध का महिमामंडन सही है। पंजाब सरकार की सख्ती के बाद अब अन्य राज्यों, खासकर महाराष्ट्र, से भी इसी तरह के कदम उठाने की मांग तेज हो रही है।

