जालना में बोले कन्हैया कुमार: समतामूलक समाज व्यवस्था ही बचा सकती है लोकतंत्र और संविधान
जालना में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर व्याख्यानमाला में बोले छात्र आंदोलन के नेता; बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता को बताया लोकतंत्र के सामने बड़ी चुनौती
जालना:
देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक असमानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते दबाव को भारतीय लोकतंत्र के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए छात्र आंदोलन के नेता Kanhaiya Kumar ने कहा कि समानता पर आधारित समाज व्यवस्था ही लोकतंत्र और संविधान की रक्षा कर सकती है। उन्होंने कहा कि B. R. Ambedkar के विचारों से प्रेरित समतामूलक समाज व्यवस्था का निर्माण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वे जालना शहर के Swami Vivekanand High School Ground में आयोजित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर व्याख्यानमाला के दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ सामाजिक नेता एडवोकेट ब्रह्मानंद चव्हाण ने की।
इस अवसर पर रिपब्लिकन सेना के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सुशील सूर्यवंशी और प्राचार्य डॉ. दादासाहेब गजहंस प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मंच पर व्याख्यानमाला के अध्यक्ष डॉ. शांताराम रायपुरे, सचिव सुधाकर रत्नपारखे, कार्याध्यक्ष साईनाथ चिन्नादोरे तथा सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सालवे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
लोकतंत्र के सामने बढ़ती चुनौतियां
“भारतीय लोकतंत्र के सामने चुनौतियां” विषय पर अपने विचार रखते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि देश में बेरोजगारी और महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय सार्वजनिक संस्थानों और सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित होनी चाहिए। यदि आम जनता इन अधिकारों से वंचित रहती है, तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर पड़ जाती है।
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समाज में बढ़ती असमानता पर जताई चिंता
अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि आज समाज को जाति और धर्म के आधार पर विभाजित करने की कोशिशें हो रही हैं। लोगों को वास्तविक मुद्दों से दूर करके भावनात्मक और धार्मिक विषयों में उलझाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में आम जनता बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रही है, जबकि विकास का लाभ केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों तक सीमित होता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और आलोचना भी जरूरी होती है, लेकिन आज कई बार सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को देशद्रोही करार देने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
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डॉ. आंबेडकर की विचारधारा को मजबूत करने की जरूरत
कन्हैया कुमार ने कहा कि सत्ता के चेहरे भले बदलते दिखाई दें, लेकिन निर्णय लेने की असली शक्ति कहीं और केंद्रित होती जा रही है। इससे सामाजिक असमानता और विभाजन को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित विचारधारा को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि समतामूलक समाज व्यवस्था के निर्माण के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर काम करना होगा। यही विचारधारा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा कर सकती है और भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।
संविधान देश की सबसे बड़ी ताकत: ब्रह्मानंद चव्हाण
कार्यक्रम के अध्यक्ष एडवोकेट ब्रह्मानंद चव्हाण ने अपने समापन संबोधन में कहा कि भारत का संविधान देश की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि यदि संविधान सुरक्षित है, तो लोकतंत्र और समानता भी सुरक्षित रहेंगे। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा देश को दिया गया संविधान एक अमूल्य धरोहर है और इसकी रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि पिछले 49 वर्षों से आयोजित की जा रही इस व्याख्यानमाला का उद्देश्य समाज में लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है, ताकि लोग अंधविश्वास से दूर होकर जागरूक नागरिक बन सकें।
बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर राजक्रांति वलसे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. विजय कुमठेकर ने किया।
इस अवसर पर अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, छात्र, नागरिक और महिलाओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही।
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