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हज 2026: यात्रियों पर ₹10,000 अतिरिक्त हवाई किराया

हज 2026 अतिरिक्त हवाई किराया ₹10,000

15 मई तक जमा करना जरूरी

हज 2026 की तैयारी के दौरान यात्रियों को क्यों अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा?

हज 2026 के लिए यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क इसलिए देना होगा क्योंकि बढ़ती ईंधन कीमतों, विमानन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के भाव में वृद्धि और वैश्विक तनाव के कारण हज उड़ानों की लागत बढ़ गई है।

  • 15 मई तक हज शुल्क जमा करना अनिवार्य है: हज 2026 की तैयारी के तहत, सभी यात्रियों को 15 मई 2026 तक करीब ₹10,000 का अतिरिक्त हवाई किराया जमा करना जरूरी है।
  • अतिरिक्त शुल्क क्यों लगाया गया है: यह शुल्क बढ़ती ईंधन कीमतों, विमानन टर्बाइन फ्यूल के भाव में वृद्धि और वैश्विक तनाव के कारण यात्राएं महंगी होने के चलते लगाया गया है।
  • सभी यात्रियों के लिए यह शुल्क आवश्यक है: यह शुल्क हर हज यात्री के लिए अनिवार्य है, किसी को भी छूट नहीं दी गई है, और इसे समय से जमा करना जरूरी है।
  • भुगतान के विकल्प और प्रक्रिया: यात्रियों ऑनलाइन हज कमेटी वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर क्रेडिट/डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग से भुगतान कर सकते हैं, साथ ही ऑफलाइन बैंक भुगतान भी उपलब्ध है।
  • अधिकारिक समय सीमा और प्रभाव: यदि यात्रियों ने 15 मई से पहले शुल्क नहीं जमा किया, तो उनकी हज प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जैसे टिकट और फ्लाइट में बाधा।

यह अतिरिक्त शुल्क कितने रुपये है और इसे कब तक जमा करना जरूरी है?

यह अतिरिक्त शुल्क लगभग ₹10,000 (100 अमेरिकी डॉलर) है, और इसे 15 मई 2026 तक पूरी तरह से जमा करना अनिवार्य है।

क्या सभी हज यात्रियों को यह शुल्क देना होगा या कुछ श्रेणियों को छूट मिलेगी?

यह शुल्क हर हज यात्री के लिए आवश्यक है, चाहे वह किसी भी शहर से यात्रा कर रहा हो। किसी को भी इस अतिरिक्त शुल्क से छूट नहीं दी गई है।

यात्रियों इस भुगतान को कैसे कर सकते हैं?

यात्रियों ऑनलाइन हज कमेटी ऑफ इंडिया की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड से या नेट बैंकिंग से भुगतान कर सकते हैं, साथ ही offline बैंक भुगतान विकल्प भी उपलब्ध है।

अगर यात्रियों ने 15 मई से पहले यह शुल्क नहीं दिया तो क्या होगा?

यदि यात्रियों ने समय सीमा से पहले यह शुल्क नहीं दिया, तो उनकी हज यात्रा की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जैसे टिकट कन्फर्मेशन और फ्लाइट अलॉटमेंट में बाधा आ सकती है।

जालना/मुंबई: हज 2026 की तैयारियों के बीच भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसने हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार अब हर हज यात्री को करीब ₹10,000 (100 अमेरिकी डॉलर) अतिरिक्त हवाई किराया जमा करना होगा। यह फैसला अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद लिया गया है।

सरकारी सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह बढ़ोतरी अचानक नहीं बल्कि वैश्विक हालात का नतीजा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बढ़ता दबाव और सबसे अहम एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज उछाल ने एयरलाइंस कंपनियों की लागत को काफी बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरलाइंस कंपनियों ने हज चार्टर उड़ानों के लिए बेस किराया 400 डॉलर से ज्यादा बढ़ाने की मांग रखी थी। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती थी कि या तो यात्रियों पर भारी बोझ डाला जाए या यात्रा प्रभावित हो। इसी स्थिति में संतुलन बनाते हुए एकमुश्त 100 डॉलर (₹10,000) का अतिरिक्त शुल्क तय किया गया।

हज यात्रा के दौरान भारत से सऊदी अरब के लिए हर साल विशेष चार्टर फ्लाइट्स चलाई जाती हैं, जिनमें हजारों यात्री एक साथ सफर करते हैं। इन उड़ानों का संचालन सीमित समय में और बड़े पैमाने पर होता है, जिससे लागत पहले से ही अधिक रहती है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में थोड़ी सी भी वृद्धि सीधे किराए पर असर डालती है। इस बार यह असर ज्यादा बड़ा रहा, जिसके कारण यह फैसला लेना पड़ा।

हज कमेटी ने साफ कर दिया है कि यह अतिरिक्त शुल्क हर यात्री के लिए अनिवार्य है, चाहे वह दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ या किसी भी अन्य शहर से यात्रा कर रहा हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह राशि 15 मई 2026 तक हर हाल में जमा करनी होगी। समय सीमा के बाद भुगतान करने पर हज यात्रा की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसमें टिकट कन्फर्मेशन, फ्लाइट अलॉटमेंट या अन्य व्यवस्थाएं अटक सकती हैं।

भुगतान के लिए यात्रियों को दो सुविधाजनक विकल्प दिए गए हैं। पहला—ऑनलाइन भुगतान, जिसमें यात्री हज कमेटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट या “हज सुविधा” मोबाइल ऐप के जरिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से सीधे भुगतान कर सकते हैं। दूसरा—ऑफलाइन बैंक भुगतान, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की किसी भी शाखा में जाकर हज कमेटी के खाते में रकम जमा की जा सकती है।

हज कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि भुगतान के बाद मिलने वाली रसीद में यूनिक बैंक रेफरेंस नंबर (UBRN) दर्ज करना अनिवार्य होगा। बिना इस नंबर के भुगतान अधूरा माना जा सकता है। साथ ही सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की हज कमेटियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के यात्रियों को तुरंत इस बदलाव की जानकारी दें और तय समय में भुगतान सुनिश्चित कराएं।

हज कमेटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शहनवाज सी., IAS ने कहा है कि यह फैसला “विशेष परिस्थितियों” में लिया गया है। उनका कहना है कि अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो हज उड़ानों के संचालन में बाधा आ सकती थी, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा प्रभावित होती।

हालांकि, इस फैसले ने कई हज यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर वे लोग, जिन्होंने पहले ही हज यात्रा की पूरी राशि जमा कर दी थी, उनके लिए अचानक आया यह ₹10,000 का अतिरिक्त खर्च आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला है। हज एक महत्वपूर्ण धार्मिक फर्ज है, जिसे पूरा करने के लिए लोग वर्षों तक बचत करते हैं और योजना बनाते हैं। ऐसे में आखिरी समय पर बढ़ा यह खर्च कई परिवारों के बजट को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों और वैश्विक तनाव का असर आने वाले समय में भी यात्रा लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में हज यात्रियों को आगे भी इस तरह के बदलावों के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि यह कदम हज यात्रा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जरूरी था, लेकिन आम यात्रियों के लिए यह फैसला “आस्था और आर्थिक बोझ” के बीच संतुलन की एक कठिन स्थिति बनाकर खड़ा कर रहा है।


🔗 महत्वपूर्ण लिंक (External)

  • हज कमेटी आधिकारिक वेबसाइट: https://hajcommittee.gov.in
  • हज सुविधा मोबाइल ऐप (Android/iOS स्टोर पर उपलब्ध)


हज 2026 अतिरिक्त हवाई किराया ₹10,000

हज 2026 अतिरिक्त हवाई किराया ₹10,000
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