India Russian Oil Imports: भारत ने मई 2026 में रूस से जीवाश्म ईंधन खरीद के मामले में दुनिया में दूसरा स्थान हासिल किया है। यूरोपीय थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने मई महीने में रूस से लगभग 5.8 अरब यूरो मूल्य के हाइड्रोकार्बन का आयात किया। इस आयात में सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा जिसकी कीमत करीब 4.8 अरब यूरो बताई गई है। इसके अलावा तेल उत्पादों और कोयले का भी बड़े पैमाने पर आयात किया गया। यह आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के बावजूद भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी तेल की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। सस्ती कीमतों पर उपलब्ध रूसी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक लाभदायक विकल्प बन चुका है।
भारतीय रिफाइनरियों ने बढ़ाई खरीद, गुजरात और ओडिशा बने प्रमुख केंद्र
रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें रूस से आयात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी सबसे बड़ी वजह रही। गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की अनलोडिंग अप्रैल की तुलना में 36 प्रतिशत बढ़ गई जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में इसकी डिलीवरी 14 प्रतिशत अधिक रही। सरकारी रिफाइनरियों ने भी रूसी तेल की खरीद दोबारा तेज कर दी है। न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने मार्च 2026 से आयात फिर शुरू किया जिसके बाद मई में इनकी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। वहीं ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक रूसी कच्चा तेल अनलोड कर नया रिकॉर्ड बनाया। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां रियायती दरों का पूरा लाभ उठाना चाहती हैं।
यूक्रेन युद्ध के बाद बदला ऊर्जा बाजार, भारत को मिला बड़ा फायदा
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों के चलते रूस को अपने तेल के लिए नए बाजार तलाशने पड़े। भारत ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया। इससे एक तरफ भारत की ऊर्जा लागत कम हुई तो दूसरी तरफ भारतीय रिफाइनरियों को तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से अच्छा मुनाफा भी मिला। CREA की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सा चीन ने खरीदा जबकि भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि एशियाई देशों ने रूसी ऊर्जा व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वैश्विक ऊर्जा संतुलन में बड़ा बदलाव आया है।
प्रतिबंधों के बावजूद दुनिया तक पहुंच रहा रूसी तेल से बना ईंधन
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद रूसी कच्चे तेल से बने उत्पाद विभिन्न देशों के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। भारत समेत कई देशों की रिफाइनरियां रूसी तेल को प्रोसेस कर तैयार उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। मई 2026 में भारत. तुर्किये. ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने प्रतिबंध लगाने वाले देशों को 641 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पाद भेजे। इनमें यूरोपीय संघ. अमेरिका. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल रहे। अमेरिका तक पहुंचने वाले कई उत्पाद भारत की जामनगर रिफाइनरी से भी निर्यात किए गए। इससे यह सवाल उठ रहा है कि प्रतिबंधों के बावजूद वैश्विक बाजार में रूसी तेल का प्रभाव किस तरह बना हुआ है और आने वाले समय में ऊर्जा व्यापार की दिशा क्या होगी।
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