लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल सख्त कदम उठाते हुए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री ने हादसे की परिस्थितियों, संभावित लापरवाही और जवाबदेही तय करने के लिए पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
घटनास्थल पहुंचे, घायलों और परिजनों से मिले
अग्निकांड की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और तुरंत लखनऊ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। इसके बाद केजीएमयू पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। देर शाम मुख्यमंत्री ने गृह, अग्निशमन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक भी की।
हाथरस और आगरा के कार्यक्रम भी किए रद्द
मुख्यमंत्री ने अग्निकांड को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार के सभी आधिकारिक कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए हैं। उन्हें हाथरस में 548 करोड़ रुपये की 143 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करना था। इसके अलावा आगरा में विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित थी। लेकिन लखनऊ हादसे की निगरानी और जांच प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए।
इन पहलुओं की गहन जांच करेगी एसआईटी
सरकार द्वारा गठित एसआईटी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच करेगी। इसमें इमारत में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, अग्नि सुरक्षा प्रबंधन और नियामक एजेंसियों की भूमिका क्या रही, संबंधित विभागों और प्रशासन की लापरवाही हुई या नहीं, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। साथ ही आग लगने के बाद राहत एवं बचाव कार्य, इमारत से लोगों की सुरक्षित निकासी और आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया का भी विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य हादसे की वास्तविक वजहों का पता लगाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
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