मणिपुर के कांगपोकपी जिले के लोइबोल खुलेन गांव में शुक्रवार तड़के अचानक हिंसा भड़क उठी। सुबह करीब 4 बजे संदिग्ध भारी हथियारों से लैस उग्रवादियों ने गांव पर हमला कर दिया। इस हमले में तीन निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई और कई परिवारों की जिंदगी पूरी तरह उजड़ गई। स्थानीय लोगों के अनुसार हमला इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला और पूरे इलाके में अफरा तफरी मच गई।
घरों में आगजनी और भारी तबाही
हमले के दौरान सिर्फ जानमाल का नुकसान ही नहीं हुआ बल्कि सात घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया। कुकी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन KIM ने आरोप लगाया है कि NSCN IM और उसके सहयोगी संगठन ZUF K के सदस्यों ने इस वारदात को अंजाम दिया। आग की लपटों में कई परिवारों की पूरी संपत्ति जलकर राख हो गई और गांव का बड़ा हिस्सा खंडहर में बदल गया।
पीड़ितों की पहचान और तीखी प्रतिक्रिया
मृतकों की पहचान लेतखोंगम हाओकिप, उनकी पत्नी टिनमेरी हाओकिप और जांगमिनलाल हाओकिप के रूप में हुई है। सभी मृतक लोइबोल खुलेन गांव के निवासी थे। KIM ने इस हमले को निहत्थे नागरिकों पर बर्बर हिंसा बताते हुए कड़ी निंदा की है। संगठन ने कहा कि यह घटना मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
जातीय तनाव की आग में जलता मणिपुर
इस घटना के बाद एक बार फिर मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष की गंभीरता सामने आ गई है। KSO साउथ वेस्ट सदर हिल्स ने भी आरोप लगाया है कि VBIG, ZUF K और NSCN IM जैसे समूह इस हमले में शामिल हैं। मई 2023 से शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा अब तक 250 से अधिक जानें ले चुकी है और करीब 60000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए यह हमला एक और गहरा सदमा लेकर आया है।
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