भारत और म्यांमार के रिश्तों को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने PM मोदी को स्पष्ट आश्वासन दिया कि उनके देश की धरती का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। पांच दिवसीय भारत दौरे पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई व्यापक वार्ता में व्यापार। रक्षा। ऊर्जा। सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय के भीतर यू मिन आंग ह्लाइंग भारत पहुंचे हैं। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई और भविष्य में साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की। इस मुलाकात को दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच रणनीतिक सहयोग के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
सीमा सुरक्षा और उग्रवादी गतिविधियों पर विशेष फोकस
बैठक के दौरान सीमा सुरक्षा और उग्रवादी गतिविधियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने उन सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर चिंता जताई जो म्यांमार की सीमा से लगे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों का प्रभाव भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ता है और कई बार सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बड़ी संख्या में शरणार्थियों के सीमा पार आने और सुरक्षा चुनौतियों के बढ़ने का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा रहा। इसके जवाब में म्यांमार के राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार ऐसी किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हो। दोनों देशों ने सीमा पर बेहतर निगरानी। बाड़बंदी और निर्धारित जांच चौकियों की व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी सहमति जताई।
व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
भारत और म्यांमार ने आर्थिक और बुनियादी ढांचा विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जल्द पूरा करने पर भी जोर दिया। कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों ने माना कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से व्यापार। पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी। इसके अलावा स्वास्थ्य। शिक्षा। ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भी इच्छा जताई गई। नई दिल्ली में हुई चर्चाओं में सार्वजनिक कूटनीति और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे तथा पूर्वोत्तर भारत के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की साझेदारी पर जोर
बैठक के दौरान म्यांमार की आंतरिक स्थिति और वहां चल रही शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। भारत ने एक बार फिर म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया। विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य म्यांमार की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करना नहीं बल्कि स्थायी शांति। समावेशिता और संवाद की प्रक्रिया को समर्थन देना है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी म्यांमार के राष्ट्रपति से मुलाकात कर विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की। राष्ट्रपति ह्लाइंग के साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भी कई महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत किया है। साथ ही यह संदेश भी दिया है कि भारत और म्यांमार क्षेत्रीय स्थिरता। विकास और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए नए अवसरों और मजबूत रणनीतिक सहयोग का आधार बन सकती है।
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