‘गांधी का नाम हटाने की साजिश’ का आरोप,
नई दिल्ली:
कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए G RAM G अधिनियम (ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन) के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि यह कदम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से ‘गांधी’ का नाम हटाने की साजिश का हिस्सा है और इससे गरीबों के रोजगार अधिकारों पर सीधा हमला किया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए आजीविका की गारंटी है। इसके नाम और स्वरूप में बदलाव कर सरकार गांधीजी के विचारों और संविधान की सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बिना व्यापक राजनीतिक सहमति और राज्यों से परामर्श के एकतरफा तरीके से लिया गया।
मनरेगा से G RAM G तक: विवाद की जड़
केंद्र सरकार का दावा है कि नया G RAM G अधिनियम ग्रामीण रोजगार को अधिक उत्पादक, कौशल-आधारित और दीर्घकालिक बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार के अनुसार, इस कानून से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आएगी।
हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि नाम बदलने के साथ-साथ योजना की मूल आत्मा—रोजगार की कानूनी गारंटी—कमजोर हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि पंचायतों की भूमिका घटाई जा रही है और गरीब मजदूरों के अधिकारों पर अनिश्चितता पैदा की जा रही है।
देशभर में विरोध प्रदर्शन की तैयारी
कांग्रेस ने सभी प्रदेश और जिला इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला मुख्यालयों, ब्लॉक स्तर और ग्राम पंचायतों तक विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। इन प्रदर्शनों में सत्याग्रह, धरना, रैलियां और जनसभाएं शामिल होंगी। पार्टी ने इसे ‘संविधान और गांधी की विरासत की रक्षा’ का आंदोलन बताया है।
वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेता भी इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह लड़ाई केवल नाम बदलने के खिलाफ नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के श्रमिकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए है।

राजनीतिक और सामाजिक असर
देश के कई राज्यों में पहले से ही मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में रोजगार, मजदूरी भुगतान और काम के दिनों की गारंटी को लेकर चिंता जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मनरेगा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिसका असर संसद से लेकर सड़कों तक दिखाई देगा।

आगे की रणनीति
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठकों में आंदोलन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण गरीबों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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