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वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई – धार्मिक अधिकार बनाम पारदर्शिता

वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: धार्मिक अधिकार बनाम पारदर्शिता की जंग

भारत में वक्फ संपत्तियाँ लंबे समय से सामाजिक, धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों का आधार रही हैं। वक्फ वह संपत्ति होती है जिसे व्यक्ति इस्लामी परंपरा के तहत अल्लाह के नाम समर्पित कर देता है ताकि उसका उपयोग मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान, सामाजिक कल्याण या गरीबों की मदद जैसे कार्यों में हो सके। वर्तमान में भारत में लाखों वक्फ संपत्तियाँ दर्ज हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत कई लाख करोड़ रुपये है।

साल 1995 का वक्फ अधिनियम इन संपत्तियों के प्रबंधन के लिए प्रमुख कानून था। लेकिन सरकार ने 2025 में नया वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 (Waqf Amendment Act, 2025) लागू किया, जिसके कई प्रावधानों ने विवाद खड़ा कर दिया। अब इसकी वैधता सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के अधीन है, और सोमवार को शीर्ष अदालत इस पर अंतरिम आदेश सुनाने जा रही है।

वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के प्रमुख प्रावधान

  • वक्फ बाय यूजर समाप्त: अब बिना दस्तावेज़ के लंबे धार्मिक उपयोग से वक्फ मान्यता नहीं मिलेगी।
  • स्वामित्व और धर्म की शर्त: वक्फ घोषित करने वाले व्यक्ति को संपत्ति का मालिक और कम-से-कम पाँच वर्षों से मुस्लिम होना चाहिए।
  • वक्फ-अल-ओलाद: उत्तराधिकारियों, विशेषकर महिलाओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
  • प्रशासनिक हस्तक्षेप: कलेक्टर और सरकारी अधिकारी सर्वेक्षण व पंजीकरण करेंगे।
  • महिला प्रतिनिधित्व: वक्फ बोर्डों में मुस्लिम महिलाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।
  • न्यायिक समीक्षा: अब ट्रिब्यूनल के फैसले हाईकोर्ट में चुनौती दिए जा सकेंगे।

याचिकाकर्ताओं की आपत्तियाँ

कई मुस्लिम संगठनों और वक्फ बोर्डों ने इस अधिनियम को चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह कानून:

  • अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।
  • “वक्फ बाय यूजर” को हटाकर सदियों पुरानी संपत्तियों का दर्जा खत्म कर सकता है।
  • कलेक्टर को शक्तियाँ देकर सरकारी नियंत्रण बढ़ाता है।
  • गैर-मुसलमानों की नियुक्ति धार्मिक स्वायत्तता के खिलाफ है।
  • उत्तराधिकारियों के अधिकार व्यवहार में सुरक्षित नहीं रह पाएंगे।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने अधिनियम का बचाव करते हुए कहा कि:

  • इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • महिला प्रतिनिधित्व और समावेशिता सुनिश्चित होगी।
  • संसद को प्रशासनिक सुधार लाने का पूरा अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की पीठ (CJI बी. आर. गवई और जस्टिस ए. जी. मसीह) इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने खासकर “वक्फ बाय यूजर” और “कलेक्टर की शक्तियों” पर रोक की मांग की है।

कानूनी विश्लेषण

सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के अनुसार, “धार्मिक गतिविधि” और “धर्म से जुड़ा प्रशासनिक कार्य” अलग माने जाते हैं। यदि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन प्रशासनिक कार्य माना गया तो सरकार का हस्तक्षेप वैध होगा। यदि यह धार्मिक आचरण का हिस्सा माना गया तो इसे असंवैधानिक ठहराया जा सकता है।

संभावित फैसले

  • आंशिक रोक: विवादित प्रावधानों पर रोक लगाकर बाकी कानून लागू रह सकता है।
  • पूर्ण रोक: यदि कानून धार्मिक अधिकारों पर हमला माना गया तो पूरे अधिनियम पर रोक लग सकती है।
  • कोई रोक नहीं: कोर्ट अधिनियम को पूरी तरह लागू रहने दे और अंतिम फैसले तक प्रतीक्षा करे।

निष्कर्ष

वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और धार्मिक स्वतंत्रता पर दूरगामी प्रभाव डालेगा। यह मामला सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही नहीं बल्कि भारत के धर्म-राज्य संबंधों के लिए भी ऐतिहासिक साबित हो सकता है।


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