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ICU मानकों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त | 3 हफ्तों में एक्शन प्लान, स्वास्थ्य अधिकार को मजबूती
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में ICU के न्यूनतम मानक लागू करने के लिए राज्यों को 3 हफ्तों में कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: फर्जी वसीयत पर खरीदार नहीं होगा दोषी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—फर्जी वसीयत के आधार पर संपत्ति खरीदने वाले खरीदार को बिना सबूत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जानें पूरा फैसला।
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महिला वकीलों के लिए आरक्षण आवश्यक: नोटरी एसोसिएशन की मांग; 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नोटरी एसोसिएशन, जालना ने बार काउंसिल चुनावों में महिला वकीलों के लिए आरक्षण की मांग की है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 1 दिसंबर को सुनवाई निर्धारित है; याचिका में राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं का सार्थक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अपील शामिल है।
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तफ्तीश में अनिश्चित देरी आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन — सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर एडवोकेट महेश धन्नावत की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों की जांच में अनिश्चित देरी को आरोपी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना। जालना के एडवोकेट महेश धन्नावत ने इस फैसले को न्याय व्यवस्था का ऐतिहासिक पड़ाव बताया, जिसे शिवाजी महाराज की त्वरित व निष्पक्ष न्याय परंपरा की आधुनिक पुनर्पुष्टि कहा गया।
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आईएसआईएस से संबंधों के आरोप में जमानत खारिज: सुप्रीम कोर्ट बोला— “समाज को संदेश देने का यही सही समय”
सुप्रीम कोर्ट ने आईएसआईएस विचारधारा को बढ़ावा देने और आतंकी साजिश के आरोपित की जमानत याचिका खारिज की। खंडपीठ ने कहा— “समाज को संदेश देने का यही सर्वोत्तम समय है।” ट्रायल दो वर्षों में पूरा करने के निर्देश।
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गिरफ्तार व्यक्तियों को लिखित रूप में गिरफ्तारी की वजह देना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि गिरफ्तार व्यक्तियों को अटके की वजह उनकी समझ की भाषा में लिखित रूप में देना अनिवार्य है। यह निर्णय नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है, और यदि नियमों का पालन नहीं होता है, तो गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी। यह आदेश सभी राज्यों में लागू होगा।
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“श्रद्धा सर्वोपरि” — सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; धार्मिक परंपराओं की सुरक्षा को मिला कानूनी बल
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवायूर मंदिर में प्रशासनिक कारणों से पूजा रद्द करने के निर्णय को खारिज किया। एडवोकेट महेश एस. धन्नावत ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं की रक्षा बताया।
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वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई – धार्मिक अधिकार बनाम पारदर्शिता
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर अंतरिम आदेश सुनाएगा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता और महिला प्रतिनिधित्व का कदम बता रही है।







