सुप्रीम कोर्ट की पर्यावरण अनुकूल दीवाली संबंधी टिप्पणी के बाद जनजागरण की पहल; प्रत्येक नागरिक पर्यावरण का ब्रांड एंबेसडर बने; गायत्री परिवार की सामूहिक दीपयज्ञ की अपील।
जालना, प्रतिनिधि : 29 अक्टूबर 2026 को पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विराट कोहली जैसी प्रसिद्ध हस्तियों से पर्यावरण अनुकूल दीवाली का प्रचार करने और विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिए जाने की खबर है। इस पृष्ठभूमि में जालना की जिलाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य आशिमा मित्तल की पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रेरणा को व्यापक जनजागरण से जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया गया है। न्यायालय की टिप्पणी के बारे में जनजागरण करना एक महत्वपूर्ण नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। संदेश है कि दीवाली की रोशनी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में खुशी लाए, प्रदूषण नहीं।
‘जालना का हर नागरिक पर्यावरण का ब्रांड एंबेसडर बने।’ जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने यह संदेश दिया है कि जिले की पालकमंत्री पंकजा मुंडे राज्य की पर्यावरण मंत्री हैं, इसलिए पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। दीवाली का मूल उद्देश्य परिवारों को जोड़ना, संबंधों को मजबूत करना और दूसरों के जीवन में आनंद लाना है। समय के साथ पटाखों का महत्व बढ़ गया, लेकिन त्योहार की वास्तविक भावना को जीवित रखने के लिए पारिवारिक मतभेद दूर करना, मिलकर आसपास सफाई करना, प्रकृति की रक्षा करना और जरूरतमंदों की सहायता करना आवश्यक है।
स्कूलों से घर-घर पहुंचे संदेश : विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक और विद्यार्थी पर्यावरण अनुकूल दीवाली के प्रति जागरूकता बढ़ाएं। बच्चों को वायु एवं ध्वनि प्रदूषण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और स्वच्छता के महत्व के बारे में बताया जाए। प्रत्येक विद्यार्थी अपने परिवार को भी इस अभियान से जोड़े।
‘हर कॉलोनी के मंदिर में सामूहिक दीपयज्ञ करें’ — एडवोकेट महेश एस. धन्नावत : गायत्री परिवार की संकल्पना पर उन्होंने कहा, “हर कॉलोनी, सोसायटी और बस्ती के नागरिक पास के मंदिर में एकत्र होकर सामूहिक दीप प्रज्वलन और गायत्री दीपयज्ञ करें। प्रत्येक परिवार एक दीपक लाए तथा पर्यावरण संरक्षण, पानी बचाने, स्वच्छता और जरूरतमंदों की मदद का संकल्प ले। पटाखों पर अनावश्यक खर्च से बची राशि का उपयोग सूखे से प्रभावित किसानों और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए करें। भगवान के सामने जलाया दीप भक्ति का प्रतीक है, लेकिन दुखी व्यक्ति के जीवन में आशा का दीप जलाना ही सच्ची ईश्वरसेवा है।”
गायत्री परिवार ने स्कूलों, कॉलेजों, महिला मंडलों, व्यापारियों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों से भागीदारी की अपील की है। हर घर में पारिवारिक एकता, हर मोहल्ले में सफाई, हर मंदिर में सामूहिक दीपयज्ञ और हर जरूरतमंद के जीवन में खुशियों का प्रकाश — यही अभियान का संदेश है। नरसेवा ही नारायणसेवा, मानवसेवा ही माधवसेवा।
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