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जनगणना 2027: पहचान पत्र बिना जनगणना कार्य कर रहे प्रगणक, आवारा कुत्तों और लोगों के संदेह से बढ़ी मुश्किलें

Hindi census awareness poster: a government enumerator with a Backpack labeled Census 2027 talks to a man at a doorway on a narrow street, with bullet points about identity, safety, and inclusion on the left.

जालना शहर में 457 प्रगणकों के माध्यम से घर सूचीकरण और गृह गणना शुरू, आवश्यक सामग्री के अभाव में कर्मचारियों में नाराजगी

जालना : देशभर में शुरू हुई जनगणना 2027 की प्रक्रिया के तहत जालना शहर में भी घर सूचीकरण और गृह गणना अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। Jalna Municipal Corporation क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए 457 प्रगणकों की नियुक्ति की गई है। इन प्रगणकों में अधिकतर शहर के विभिन्न स्कूलों के शिक्षक शामिल हैं, जिन्हें घर-घर जाकर नागरिकों की जानकारी एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हालांकि, इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत के साथ ही कई प्रशासनिक खामियां सामने आने लगी हैं। बड़ी संख्या में प्रगणकों ने शिकायत की है कि उन्हें अब तक पहचान पत्र, क्षेत्रीय नक्शे, बैग और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके कारण उन्हें काम करने में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पहचान पत्र नहीं होने से लोगों में संदेह

प्रगणकों का कहना है कि बिना आधिकारिक पहचान पत्र के नए इलाकों में जाने पर स्थानीय नागरिक उन्हें संदेह की नजर से देख रहे हैं। कई लोग घरों के दरवाजे खोलने से पहले लंबी पूछताछ कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर लोगों ने जानकारी देने से भी इनकार कर दिया।

प्रगणकों के अनुसार, यदि उन्हें अधिकृत पहचान पत्र और स्पष्ट निर्देश पहले ही उपलब्ध करा दिए जाते तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। जनगणना जैसे संवेदनशील कार्य में नागरिकों का भरोसा जीतना बेहद जरूरी होता है, लेकिन आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

भारत सरकार की आधिकारिक जनगणना वेबसाइट पर भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि प्रगणकों को अधिकृत पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही फील्ड में भेजा जाना चाहिए।
भारत सरकार जनगणना पोर्टल

आवारा कुत्तों से भी जूझ रहे प्रगणक

प्रगणकों की परेशानी केवल लोगों के संदेह तक सीमित नहीं है। कई कर्मचारियों ने बताया कि अपरिचित लोगों को देखकर गली के आवारा कुत्ते उनके पीछे पड़ जाते हैं। कई इलाकों में कुत्तों के झुंड के कारण घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करना जोखिम भरा हो गया है।

शहर के कुछ हिस्सों में आवारा कुत्तों की संख्या पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में रोजाना नए इलाकों में जाकर सर्वे करने वाले कर्मचारियों को डर और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

कुछ प्रगणकों ने बताया कि उन्हें कई बार कुत्तों से बचने के लिए रास्ता बदलना पड़ा, जबकि कुछ मामलों में स्थानीय नागरिकों की मदद से स्थिति संभाली गई। भीषण गर्मी और लगातार पैदल घूमने के कारण काम और भी कठिन हो गया है।

भीषण गर्मी में बढ़ी परेशानी

महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इस समय तापमान लगातार बढ़ रहा है। दोपहर के समय घर-घर जाकर सर्वे करना कर्मचारियों के लिए चुनौती बन गया है। कई प्रगणकों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए ड्यूटी करने में असमर्थता जताई है।

कुछ शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना फील्ड में भेज दिया गया। कई कर्मचारियों को पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

457 प्रगणकों पर बड़ी जिम्मेदारी

जानकारी के अनुसार, जालना शहर में लगभग 457 प्रगणकों को इस अभियान में लगाया गया है। प्रत्येक छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है, जो पूरे कार्य की निगरानी करेगा।

प्रशासन की ओर से क्षेत्रवार नक्शे उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कई कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब तक सही नक्शे नहीं मिले हैं। इसके कारण घर सूचीकरण के दौरान कई इलाकों में भ्रम की स्थिति बन रही है।

जनगणना अभियान 14 जून तक पूरा किया जाना है। ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई तो अभियान प्रभावित हो सकता है।

कर्मचारियों में नाराजगी का माहौल

जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है। कई प्रगणकों का कहना है कि उन्हें स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर ड्यूटी से दूरी बना ली है, जबकि कुछ लोगों ने भीषण गर्मी और संसाधनों की कमी के कारण यह जिम्मेदारी निभाने में कठिनाई जताई है।

इसके अलावा कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि कुछ लोगों ने प्रभाव और पहचान के आधार पर अपनी ड्यूटी हटवा ली है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

प्रगणकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सभी कर्मचारियों को आधिकारिक पहचान पत्र, क्षेत्रीय नक्शे, बैग और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्हें स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा संबंधी आवश्यक सुविधाएं भी दी जाएं।

कर्मचारियों का कहना है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य को सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त संसाधन और सुरक्षा मिलना बेहद जरूरी है।

जनगणना से जुड़ी विस्तृत जानकारी और दिशा-निर्देश भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
जनगणना 2027 आधिकारिक जानकारी

स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि यदि प्रशासन बेहतर योजना और संसाधनों के साथ यह अभियान चलाए तो जनगणना कार्य अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है।


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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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