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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: फर्जी वसीयत पर खरीदार नहीं होगा दोषी

फर्जी वसीयत खरीदार दोषी नहीं सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: फर्जी वसीयत पर खरीदी संपत्ति में खरीदार नहीं माना जाएगा दोषी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति विवादों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई संपत्ति बाद में फर्जी वसीयत (विल) के आधार पर खरीदी गई पाई जाती है, तो केवल इस आधार पर खरीदार को आपराधिक रूप से दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक खरीदार की सीधी भूमिका जालसाजी या साजिश में साबित न हो, तब तक उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।


मामला क्या है?

यह मामला तमिलनाडु में एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके पिता द्वारा 1988 में बनाई गई वसीयत फर्जी थी। इसी कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसके भाई ने 1998 में कई लोगों को संपत्ति बेच दी, जिनमें अपीलकर्ता भी शामिल था।

बाद में इस पूरे मामले में भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए। अपीलकर्ता ने अदालत में याचिका दाखिल कर खुद को एक ईमानदार (बोना फाइड) खरीदार बताया और कहा कि उसका कथित फर्जी वसीयत से कोई संबंध नहीं है।


कोर्ट की अहम टिप्पणी

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि:

  • केवल इस आधार पर कि संपत्ति का सौदा फर्जी दस्तावेज पर आधारित पाया गया, खरीदार को आपराधिक मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
  • यदि खरीदार ने उचित जांच-पड़ताल के बाद संपत्ति खरीदी है और उसे फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं थी, तो उसे दोषी नहीं माना जाएगा।
  • मामले में खरीदार के खिलाफ साजिश या जालसाजी में शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

अदालत ने यह भी माना कि संबंधित समय पर खरीदार नाबालिग था और विदेश में था, जिससे उसके खिलाफ आरोप और कमजोर हो जाते हैं।


पुराने फैसलों का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में Mohammed Ibrahim vs State of Bihar (2009) मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि विक्रेता के अधिकारों में कमी होने मात्र से खरीदार पर धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

इसी आधार पर S. Anand vs State of Tamil Nadu (2026) में अपीलकर्ता के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।


विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश एस. धन्नावत के अनुसार, यह फैसला ईमानदार खरीदारों के लिए बेहद राहत देने वाला है। उन्होंने कहा:

“अक्सर खरीदार को विक्रेता की धोखाधड़ी की जानकारी नहीं होती और वह अनावश्यक कानूनी मामलों में फंस जाता है। इस फैसले से ऐसे मामलों में खरीदार की स्थिति मजबूत होगी।”


क्या है इस फैसले का असर?

यह निर्णय भविष्य में संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। इससे साफ हो गया है कि:

  • खरीदार को केवल दस्तावेज फर्जी होने के आधार पर आरोपी नहीं बनाया जा सकता
  • जांच में खरीदार की भूमिका और मंशा महत्वपूर्ण होगी
  • ईमानदार खरीदारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी

जरूरी सावधानी (पाठकों के लिए उपयोगी)

संपत्ति खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • सभी दस्तावेजों की कानूनी जांच कराएं
  • वसीयत, मालिकाना हक और रिकॉर्ड की पुष्टि करें
  • विश्वसनीय वकील से सलाह लें
  • सरकारी रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन की जांच करें



यह फैसला संपत्ति विवादों में एक बड़ा कानूनी मार्गदर्शक साबित होगा और ईमानदार खरीदारों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत देगा।

फर्जी वसीयत खरीदार दोषी नहीं सुप्रीम कोर्ट

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