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सबूतों से छेड़छाड़ पड़ी भारी: पुणे पोर्शे हिट-एंड-रन केस में सुप्रीम कोर्ट का नोटिस Pune Porsche hit and run case

सबूतों से छेड़छाड़ पड़ी भारी

सबूतों से छेड़छाड़ पड़ी भारी: पुणे पोर्शे हिट-एंड-रन केस में पैसों की ताकत ने अपराध को और संगीन बनाया

पुणे | विशेष संवाददाता
पुणे के बहुचर्चित पोर्शे हिट-एंड-रन मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून से बचने के लिए की गई चालाकी और सबूतों से छेड़छाड़ अंततः आरोपियों के लिए ही घातक साबित होती है। इस सनसनीखेज मामले में, जिसमें कथित तौर पर नशे की हालत में पोर्शे कार चला रहे एक नाबालिग की टक्कर से दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी, अब कानूनी शिकंजा और कसता नजर आ रहा है। Pune Porsche hit and run case

मामले में अहम मोड़ तब आया जब भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपी व्यवसायियों आशिष मित्तल और आदित्य सूद की जमानत याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। इससे पहले इन दोनों समेत अन्य आरोपियों को बॉम्बे हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी।


कानून से बचने की कोशिश, उल्टा पड़ी भारी

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में केवल दुर्घटना तक ही जांच सीमित रहती, तो स्थिति अलग हो सकती थी। लेकिन आरोपियों द्वारा कथित तौर पर सबूत नष्ट करने, बदलने और जांच को गुमराह करने की कोशिश ने पूरे प्रकरण को एक संगठित अपराध का रूप दे दिया।
पैसे और प्रभाव के दम पर कानून से बचने की कोशिश ने कई ऐसे लोगों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया, जिनका दुर्घटना से सीधा संबंध नहीं था, लेकिन जिन्होंने बाद में कथित रूप से न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।

Pune Porsche hit and run case

रक्त नमूने बदलने का गंभीर आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, मुख्य आरोपी नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल के अलावा आशिष मित्तल और आदित्य सूद पर यह गंभीर आरोप है कि उन्होंने कार में मौजूद अन्य दो नाबालिगों के रक्त नमूनों को अपने रक्त नमूनों से बदलवाया। इन दोनों नाबालिगों के भी शराब के नशे में होने की आशंका जताई गई थी। Pune Porsche hit and run case

इतना ही नहीं, आरोप है कि:

  • डॉ. अजय तावरे और डॉ. श्रीहरी हाळनोर ने कथित तौर पर पैसे लेकर रक्त नमूनों में हेरफेर की,
  • जबकि अश्पाक मकंदर और अमर गायकवाड ने इस पूरे घटनाक्रम में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

इन सभी के खिलाफ जालसाजी, सबूत नष्ट करने और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोपों में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

Pune Porsche hit and run case

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को आठों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कड़ा रुख अपनाया था। न्यायमूर्ति श्याम चांडक की एकल पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि नाबालिग चालक को बचाने के लिए सबूत नष्ट करने और झूठे दस्तावेज तैयार करने की एक संगठित आपराधिक साजिश प्रथम दृष्टया सामने आती है।

अदालत ने यह भी कहा कि:

  • नशे की हालत को नकारने के लिए फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र बनाए गए,
  • एमएलसी रजिस्टर में गलत प्रविष्टियां की गईं,
  • और रक्त नमूनों पर भ्रामक जानकारी वाले लेबल लगाए गए।

यह सब कथित तौर पर भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 304 (अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103) के तहत होने वाली सख्त सजा से बचने के उद्देश्य से किया गया।

Pune Porsche hit and run case

‘कानून सबके लिए बराबर है’

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश एस. धन्नावत ने कहा,

“कानून सभी के लिए समान है। कोई भी व्यक्ति अवैध कृत्य में शामिल होकर या किसी को अवैध तरीके से बचाने का प्रयास कर खुद को और दूसरों को बड़े संकट में डालता है। इस प्रकरण से समाज को यही सबक लेना चाहिए कि सत्य कभी छिपता नहीं और कानून का हाथ अपराधियों तक पहुंचता ही है।”


सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, नजीर बनने की संभावना

हाईकोर्ट के आदेश को अब सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। न्यायालय ने जमानत याचिकाओं पर नोटिस जारी कर मामले की गंभीरता को रेखांकित किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस में आने वाला फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मजबूत मिसाल बन सकता है—खासकर उन मामलों में, जहां प्रभावशाली लोग सबूतों से छेड़छाड़ कर कानून से बचने की कोशिश करते हैं।

पुणे पोर्शे केस अब केवल एक सड़क दुर्घटना का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था, समानता और कानून के राज की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।


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