नाबालिग से विवाह और संबंधों पर हाईकोर्ट सख्त: POCSO के तहत पति की याचिका खारिज, अदालत ने कहा—नाबालिग की सहमति वैध नहीं
उप-शीर्षक: किशोरावस्था के प्रेम संबंध भी कानून के दायरे में; स्कूलों में POCSO और बाल विवाह कानून पर जागरूकता जरूरी।
“हमने प्रेम किया, शादी की और हमारा एक बच्चा भी है।” — ऐसे तर्कों के बावजूद मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने नाबालिग पत्नी से संबंध बनाने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की आरोपी पति की मांग ठुकरा दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून नाबालिग लड़की की सहमति को वैध नहीं मानता, इसलिए गंभीर अपराधों में राहत नहीं दी जा सकती। यह फैसला किशोरावस्था के प्रेम संबंधों और बाल-विवाह को लेकर चल रही सामाजिक ढिलाई पर भी बड़ा संदेश माना जा रहा है।
पूरा मामला क्या है?
अकोला जिले के तेलहरा निवासी 29 वर्षीय मिर्ज़ा असलम बेग का 17 वर्षीय लड़की से प्रेम संबंध था। दोनों परिवारों की सहमति से 2 जून 2024 को उनका निकाह हुआ, जबकि लड़की उस समय नाबालिग थी। बाद में 10 मई 2025 को उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
पुलिस को इसकी जानकारी मिलते ही हवलदार राहुल तायडे की शिकायत पर आरोपी पति और उसके परिवार के दो सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आरोप में शामिल प्रावधान थे—
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 64(1) — (पूर्व IPC 376 – बलात्कार)
- POCSO Act 2012 की धारा 4(1) और 8
- बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम 2006 की धारा 9, 10, 11
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
आरोपियों ने BNSS 2023 (पूर्व CrPC 482) के तहत FIR रद्द करने की याचिका दायर कर कहा—
- यह किशोरावस्था का प्रेम प्रसंग था
- दोनों की शादी हो चुकी है
- उनके बीच कोई विवाद नहीं है
- एक बच्चा भी है, मुकदमा चलने से भविष्य प्रभावित होगा
- पीड़िता ने भी केस रद्द करने पर आपत्ति न जताने की बात कही
लेकिन सरकारी वकील का तर्क था कि घटना के समय लड़की नाबालिग थी और 18 वर्ष से कम उम्र की सहमति कानूनी तौर पर अवैध मानी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि 29 वर्षीय आरोपी को कानून की जानकारी होनी चाहिए थी और इसलिए कठोर प्रावधान लागू होने चाहिए।
अदालत का स्पष्ट रुख
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा—
- POCSO का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है।
- नाबालिग लड़की की सहमति भी वैध नहीं होती।
- प्रेम संबंध होने के बावजूद कानून में छूट नहीं मिल सकती।
- आरोपी को लड़की की वास्तविक उम्र की पुष्टि करनी चाहिए थी।
- कानून में अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए कठोर प्रावधान लागू रहेंगे।
विशेषज्ञों की राय
नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश एस. धन्नावत ने कहा—
“यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। कई युवा भावनाओं में बहकर कानून तोड़ देते हैं और इसका खामियाजा जीवनभर भुगतते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में POCSO कानून, वयस्कता की कानूनी उम्र (18 वर्ष) और बालविवाह के दुष्परिणामों पर छात्रों को जागरूक करना आवश्यक है। माता-पिता को भी बच्चों से इस विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए।”
निष्कर्ष
अदालत का यह निर्णय स्पष्ट रूप से बताता है कि—
- नाबालिग लड़की से संबंध या विवाह—दोनों ही कानूनन अपराध हैं।
- शादी या प्रेम संबंध कानून के कठोर प्रावधानों से बचाव नहीं बन सकते।
- किशोर-वय के युवाओं और उनके माता-पिता को कानून का पालन करते हुए सजग रहना आवश्यक है।
NewsNationOnline Team

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