अंबड न्यायालय का कड़ा फैसला: अग्रिम जमानत की शर्तें तोड़ने पर चार आरोपियों की जमानत रद्द
जालना: अंबड स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में अवैध रेत खनन से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत पर रिहा किए गए चार आरोपियों की जमानत रद्द कर दी है। यह कार्रवाई आरोपियों द्वारा न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन न करने पर की गई।
मामला 19 जून 2025 का है, जब जालना जिले के गोंदी गांव में स्थित गोदावरी नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन की शिकायत पर कृष्णा सांडूजी ऐडके नामक व्यक्ति ने गोंदी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) और 3(5) के तहत अपराध क्रमांक 230/2025 दर्ज किया गया।
इस मामले में जिन चार आरोपियों को अग्रिम जमानत मिली थी, वे हैं:
- पंकज सखाराम सोलुंके
- सुयोग उर्फ सुशील मधुकर सोलुंके
- गजु उर्फ गजानन उर्फ सचिन गणपत सोलुंके
- किशोर प्रभु खराद
1 जुलाई 2025 को न्यायालय ने इन सभी आरोपियों को सशर्त अग्रिम जमानत दी थी, जिसमें स्पष्ट निर्देश था कि आरोपी जांच में सहयोग करेंगे और जब भी बुलाया जाए, पुलिस के समक्ष उपस्थित होंगे। लेकिन आरोपियों ने इन शर्तों का स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया। पुलिस स्टेशन द्वारा बार-बार बुलाने पर भी आरोपी जांच में शामिल नहीं हुए।
इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए गोंदी पुलिस स्टेशन के पुलिस उपनिरीक्षक बी. यू. पद्मणे ने एडवोकेट वाल्मीक घुगे के माध्यम से न्यायालय में अर्जियां (क्रमांक 23/2025 व 24/2025) दाखिल कीं और नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483(3) के अंतर्गत जमानत रद्द करने की मांग की।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, न्यायाधीश एम. जे. जे. बेग ने पाया कि आरोपी न्यायालय की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं और इस आधार पर उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी गई।
इस मामले में सरकारी पक्ष की ओर से जिला सहायक सरकारी वकील वाल्मीक घुगे ने प्रभावी रूप से पैरवी की।

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