‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज़ पर हाईकोर्ट की रोक, केंद्र को एक सप्ताह में निर्णय का आदेश; रज़ा अकादमी और जमीयत की याचिका पर सुनवाई
नई दिल्ली | 11 जुलाई 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने बहुचर्चित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की 11 जुलाई को प्रस्तावित रिलीज़ पर रोक लगा दी है। यह फैसला जमीयत उलमा-ए-हिंद और रज़ा अकादमी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया, जिसमें दावा किया गया कि फिल्म सांप्रदायिक तनाव को भड़काने वाली है।
कोर्ट का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की खंडपीठ ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार पुनरीक्षण याचिका पर निर्णय नहीं ले लेती, फिल्म की रिलीज़ पर स्थगन लागू रहेगा। याचिकाकर्ताओं को दो दिन के भीतर पुनरीक्षण याचिका दाखिल करनी होगी और सरकार को एक सप्ताह में फैसला लेना होगा।
रज़ा अकादमी और जमीयत की आपत्तियाँ
रज़ा अकादमी ने फिल्म को “भड़काऊ” और “सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ” बताया। वहीं जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने ट्रेलर में दिखाए गए दृश्यों को देश में तनाव का कारण बताया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसे “cinematic vandalism” बताया और अदालत से फिल्म की समीक्षा की अपील की।
निर्माताओं और CBFC का पक्ष
निर्माताओं का कहना है कि यह फिल्म एक क्राइम थ्रिलर है, जिसका उद्देश्य सांप्रदायिकता नहीं बल्कि सामाजिक चेतना बढ़ाना है। CBFC के प्रतिनिधि ने बताया कि फिल्म को 55 कट्स के बाद प्रमाणन मिला है और अगर आपत्तिजनक सामग्री पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
विशेष स्क्रीनिंग और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग कराने का निर्देश भी दिया ताकि याचिकाकर्ता पूरी फिल्म देखकर अपनी आपत्तियों की पुष्टि कर सकें। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि उसने फिल्म पर रोक लगाने संबंधी कोई लिखित आदेश पारित नहीं किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह फिल्म 2022 में उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या पर आधारित है। उनकी हत्या दो कट्टरपंथियों द्वारा की गई थी, जिन्होंने बाद में वीडियो जारी कर दावा किया कि हत्या पूर्व BJP नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में की गई पोस्ट के चलते की गई। मामला NIA के अधीन चल रहा है और UAPA सहित गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है।
निष्कर्ष
‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज़ पर रोक फिलहाल कायम रहेगी जब तक केंद्र सरकार याचिका पर विचार नहीं कर लेती। यह मामला अब सेंसर बोर्ड, सरकार और अदालत के संतुलित हस्तक्षेप के बीच निर्णीत होगा।
स्रोत: LiveLaw, TOI, India Today, Tribune India

