प्रयागराज/प्रतिनिधि। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि किसी घटना या अपराध की पहले से कोई सूचना अथवा खुफिया जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर पुलिस अधिकारी द्वारा कार्रवाई न करना अपने आप में कर्तव्य में लापरवाही नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर एक पुलिस अधिकारी को दी गई ‘निंदा’ की सजा और उसे बरकरार रखने वाले प्रशासनिक लवाद के आदेश को रद्द कर दिया।
पूर्व सूचना के बिना कार्रवाई की अपेक्षा उचित नहीं
यह फैसला न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई उपलब्ध जानकारी और प्राप्त इनपुट के आधार पर होती है। इसलिए यदि किसी संभावित अपराध के बारे में पहले से कोई सूचना ही नहीं मिली हो, तो अधिकारी से कार्रवाई की अपेक्षा करना उचित नहीं होगा।
पहले भी बरामद हुए थे अवैध पटाखे और विस्फोटक
मामला एक पुलिस अधिकारी से जुड़ा है, जो संबंधित क्षेत्र में उस समय चौकी प्रभारी के पद पर तैनात थे। उनके क्षेत्र में 7 नवंबर 2023 को शादाब नाम के व्यक्ति के घर पर छापा मारा गया था। इस दौरान बड़ी मात्रा में अवैध पटाखे और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी।
इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 286 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 9-बी(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच एक अन्य उपनिरीक्षक को सौंपी गई थी।
इसके बाद 22 जनवरी 2024 को शादाब के घर में अचानक विस्फोट हो गया। विस्फोट के कारण घर का सीमेंट का स्लैब गिर गया और हादसे में दो बच्चों की मौत हो गई।
चौकी प्रभारी पर लगा था निगरानी नहीं रखने का आरोप
हादसे के बाद प्रशासन ने संबंधित चौकी प्रभारी पर आरोप लगाया कि पहले विस्फोटक सामग्री बरामद होने के बावजूद उन्होंने शादाब पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखी और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी। इसके आधार पर अधिकारी के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए तथा उन्हें ‘निंदा’ की सजा दी गई।
अधिकारी ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि वे मूल मामले के जांच अधिकारी नहीं थे। साथ ही, शादाब के घर में दोबारा विस्फोटक सामग्री जमा किए जाने के संबंध में उन्हें कोई पूर्व सूचना या खुफिया जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि विस्फोट की जानकारी मिलते ही वे तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और आवश्यक कार्रवाई की।
सरकार पूर्व सूचना का सबूत पेश नहीं कर सकी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि सरकार ऐसा कोई प्रमाण पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि शादाब के घर में दोबारा विस्फोटक सामग्री जमा किए जाने की जानकारी संबंधित पुलिस अधिकारी या चौकी को पहले से थी।
अदालत ने कहा कि जब अधिकारी के पास संभावित अपराध की कोई पूर्व सूचना नहीं थी, तो केवल इस आधार पर कि उसने पहले से कार्रवाई नहीं की, उसे लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज ‘निंदा’ की कार्रवाई रद्द कर दी। अदालत ने इस कार्रवाई को बरकरार रखने वाले प्रशासनिक लवाद के आदेश को भी निरस्त कर दिया।
अॅड. महेश धनावत ने फैसले को बताया महत्वपूर्ण
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विधि विशेषज्ञ अॅड. महेश धनावत ने कहा कि यह फैसला पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी गंभीर घटना के बाद स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाना आसान होता है, लेकिन यदि अधिकारी के पास घटना से पहले कोई सूचना या खुफिया इनपुट उपलब्ध नहीं था, तो केवल घटना हो जाने के आधार पर उसे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जा सकता।
धनावत के अनुसार, पूर्व सूचना या खुफिया जानकारी के अभाव को अपने आप में कर्तव्य में लापरवाही नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट का यह निष्कर्ष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई में उपलब्ध तथ्यों और जानकारी को ध्यान में रखने की जरूरत को रेखांकित करता है।
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