कर्नूल. आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिला उपभोक्ता आयोग ने पूरी रकम लेकर भी समय पर सोने का सिक्का न देने के मामले में एक ऑनलाइन खरीद मंच को ग्राहक को 60 हजार रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। प्रेस नोट के अनुसार आयोग ने कंपनी की ओर से दिए गए बचाव को पूरी तरह खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला
जारी प्रेस नोट के अनुसार शिकायतकर्ता जी. एन. श्रीनिवास चक्री ने ऑनलाइन मंच मिंत्रा से पांच ग्राम वजन का सोने का सिक्का खरीदा था। इसके लिए उन्होंने 59,750 रुपये की पूरी रकम चुका दी थी। इसके बावजूद कंपनी ने तय समय में सिक्का ग्राहक तक नहीं पहुंचाया।
बार-बार अनुरोध करने के बाद भी डिलीवरी नहीं दी गई। आरोप है कि कंपनी ने चालीस दिन से ज्यादा समय तक ग्राहक का पैसा अपने पास रोके रखा। इसके बाद कंपनी ने अपनी ओर से ऑर्डर रद्द कर दिया और सिर्फ मूल रकम लौटाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।
इस दौरान सोने के बाजार भाव में बड़ी बढ़ोतरी हुई। इससे ग्राहक को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और भारी मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।
आयोग का फैसला
कंपनी ने आयोग के सामने दलील दी कि वह केवल एक मध्यस्थ मंच है। आयोग ने यह तर्क पूरी तरह ठुकरा दिया। आयोग ने साफ किया कि ग्राहक से सेवा शुल्क वसूलकर समय पर सामान न देना सेवा में बड़ी कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है।
आयोग के अध्यक्ष करणम किशोर कुमार और सदस्यों ने शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये अदालती खर्च देने का फैसला सुनाया। तय समय में यह रकम न चुकाने पर कंपनी को 9 प्रतिशत सालाना दर से ब्याज देना होगा। यह फैसला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, कर्नूल में उपभोक्ता शिकायत क्रमांक 29/2026 के तहत 22 जुलाई 2026 को दिया गया।
अधिवक्ता महेश धन्नावत की प्रतिक्रिया
उपभोक्ता मामलों के अभ्यासी अधिवक्ता महेश धन्नावत ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऑनलाइन कंपनियां खुद को सिर्फ डिजिटल मध्यस्थ बताकर ग्राहकों से किए गए करार से कभी नहीं बच सकतीं। उनके मुताबिक सामान की कीमत लेकर तय समय में आपूर्ति न करना और अपनी मर्जी से खरीद रद्द कर देना ग्राहकों के अधिकारों पर सीधा हमला और गैरकानूनी तरीका है।
धन्नावत ने कहा कि सोने जैसी कीमती वस्तुओं के दाम लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए कंपनियों के ऐसे रवैये से ग्राहकों को भारी नुकसान होता है। उनका मानना है कि कर्नूल उपभोक्ता आयोग का यह स्पष्ट आदेश देशभर के डिजिटल बाजारों पर कानूनी लगाम लगाने वाला साबित होगा।
उन्होंने बताया कि किसी भी ऑनलाइन मंच द्वारा ग्राहक के साथ धोखाधड़ी किए जाने पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रावधानों के तहत पूरा मुआवजा पाना संभव है। उन्होंने अपील की कि ग्राहक ऐसे अन्याय पर चुप न बैठें और सीधे उपभोक्ता आयोग में जाकर न्याय हासिल करें। उनका विश्वास है कि यह फैसला ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर चोट करेगा और जागरूक उपभोक्ता आंदोलन को नई ताकत देगा।
मुख्य बातें
- पांच ग्राम सोने के सिक्के के लिए 59,750 रुपये पूरे चुकाने के बाद भी डिलीवरी नहीं मिली।
- आयोग ने 50 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये अदालती खर्च देने का आदेश दिया।
- तय समय में रकम न देने पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा।
- कंपनी का “सिर्फ मध्यस्थ मंच” होने का बचाव आयोग ने खारिज किया।
- उपभोक्ता शिकायत क्रमांक 29/2026 में 22 जुलाई 2026 को फैसला दिया गया।
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