फुटपाथ अतिक्रमण पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, बीएमसी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
मुंबई, 26 जुलाई 2025: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘निर्वाणा हाउसिंग सोसाइटी’ मामले की सुनवाई के दौरान फुटपाथ पर किए गए अनाधिकृत अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने इस अतिक्रमण को “ग़ैर-क़ानूनी” करार देते हुए कहा कि फुटपाथ केवल पाद यात्रियों के लिए हैं, निजी लाभ के लिए नहीं।
न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि अनधिकृत स्टॉल को बिजली कनेक्शन कैसे मिला और बीएमसी अधिकारियों ने अब तक स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की।
इसके साथ ही कोर्ट ने बीएमसी आयुक्त को निर्देश दिया कि संबंधित वॉर्ड अधिकारी, सहायक आयुक्त और क्षेत्रीय अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए नोटरी संघ के अध्यक्ष एडवोकेट महेश धन्नावत ने कहा कि यह फैसला पूरे महाराष्ट्र की महापालिकाओं के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने जालना महानगरपालिका के अधिकारियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी, क्योंकि इस तरह के अतिक्रमण से नागरिकों को मिलने वाली सार्वजनिक सुविधाएं बाधित होती हैं।
न्यायालय के इस फैसले का समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा स्वागत किया जा रहा है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में सार्वजनिक स्थानों पर किए गए निजी कब्जों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

