बरेली कोर्ट का कड़ा फैसला: अवैध धर्मांतरण मामले में आरोपी को आजीवन कारावास — “लव जिहाद जैसी प्रवृत्तियों के लिए भारतीय संविधान और इस्लाम में भी कोई जगह नहीं” : एड. महेश धन्नावत
बरेली (उत्तर प्रदेश)/जालना: अवैध धर्मांतरण, यौन शोषण और धमकी से जुड़े एक गंभीर मामले में बरेली के फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 25 वर्षीय आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध समाज की सुरक्षा, शांति और सामाजिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
नोटरी एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष एडवोकेट महेश धन्नावत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कथित ‘लव जिहाद’ न केवल भारतीय संविधान के खिलाफ है, बल्कि इस्लाम की मूल शिक्षाओं के भी विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म में जबरदस्ती, छल या लोभ द्वारा धर्मांतरण की अनुमति नहीं दी गई है।
अदालत के महत्वपूर्ण अवलोकन
- आरोपी ने अपनी पहचान छुपाकर पीड़िता को भ्रमित किया।
- उसे मंदिर ले जाकर धार्मिक रीति का दिखावा किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया।
- पीड़िता का कई बार यौन शोषण किया और गर्भपात के लिए मजबूर किया।
- आरोपी ने पीड़िता और उसके परिवार पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवी कुमार दिवाकर ने कहा कि इस प्रकार के अपराध अक्सर कमजोर और संवेदनशील वर्गों को निशाना बनाने वाले संगठित अपराध का हिस्सा होते हैं।
इस्लामी सिद्धांतों और संविधान दोनों के विपरीत — एडवोकेट धन्नावत
एडवोकेट धन्नावत ने कहा:
- इस्लाम में किसी भी प्रकार के जबरन या छलपूर्वक धर्मांतरण के लिए कोई स्थान नहीं है। “धर्म में कोई बाध्यता नहीं” — यह मूल शिक्षा है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता देता है, लेकिन दबाव, छल या प्रलोभन द्वारा कराया गया धर्मांतरण पूरी तरह अवैध है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने आरोपी मोहम्मद अलीम को भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं — 376(2)(N), 323, 504, 506 — के तहत दोषी ठहराया है। आरोपी के पिता को भी धमकी देने के मामले में सजा सुनाई गई है।
न्यायपालिका की सख्त नीति का संकेत
फास्ट-ट्रैक कोर्ट का यह फैसला ‘लव जिहाद’ और अवैध धर्मांतरण जैसे मामलों पर न्यायपालिका की स्पष्ट और कठोर नीति को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध सामाजिक सद्भाव, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं, इसलिए इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
एडवोकेट महेश धन्नावत ने सरकार और समाज से अपील की कि वे ऐसे मामलों के प्रति जागरूकता बढ़ाएँ और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सक्रिय रूप से आगे आएँ।

