चेक बाउंस मामला: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया — शिकायत उसी शहर में दर्ज हो जहां प्राप्तकर्ता का बैंक खाता है
नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि चेक बाउंस (धारा 138 एन.आई. एक्ट) के मामलों में शिकायत उसी स्थान पर दर्ज की जानी चाहिए जहां प्राप्तकर्ता (Payee) का बैंक खाता स्थित है, न कि उस स्थान पर जहां चेक को भौतिक रूप से प्रस्तुत किया गया हो।
यह फैसला न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा की पीठ ने सुनाया। यह मामला तब उठा जब एक शिकायतकर्ता ने चेक बाउंस की शिकायत कर्नाटक के मैंगलोर में दर्ज की, जहां उसका बैंक खाता था, जबकि चेक मुंबई की ऑपेरा हाउस शाखा में प्रस्तुत किया गया था।
निचली अदालत और हाईकोर्ट ने शिकायत को इस आधार पर खारिज कर दिया कि चेक मुंबई में प्रस्तुत हुआ था, इसलिए वहीं अधिकार क्षेत्र बनता है। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इन आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि धारा 142(2)(a) के अनुसार शिकायत उस अदालत में ही दर्ज हो सकती है जहां से प्राप्तकर्ता ने चेक को अपने बैंक खाते के माध्यम से वसूलने हेतु प्रस्तुत किया हो।
अदालत ने 2016 के ब्रिजस्टोन इंडिया बनाम इंदरपाल सिंह मामले का भी हवाला दिया, जिसमें इसी प्रकार की व्याख्या की गई थी। साथ ही, 2015 के संशोधन में एन.आई. एक्ट की धारा 142(2) जोड़ी गई थी, जिससे यह कानूनी स्थिति और अधिक स्पष्ट हो गई थी।
मुख्य बिंदु:
- शिकायत वहीं दर्ज होगी जहां प्राप्तकर्ता का बैंक खाता स्थित है।
- भौतिक रूप से चेक कहां प्रस्तुत किया गया, यह अब अप्रासंगिक है।
- केवल आरोपी की असुविधा आधार नहीं बन सकती केस स्थानांतरित करने का।
यह फैसला चेक बाउंस मामलों में न्यायिक स्पष्टता लाता है और अधिकार क्षेत्र को लेकर उठने वाले विवादों का समाधान करता है।

