नशा मुक्त महाराष्ट्र: राजस्थान हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद क्या अब महाराष्ट्र में भी हटेंगे हाईवे किनारे शराब दुकान?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘नशा मुक्त नवी मुंबई’ अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा, “हम जितनी तेज़ी से प्रगति कर रहे हैं, उतनी ही तेज़ी से हमारे युवाओं को ड्रग्स के ज़रिए भीतर से कमजोर किया जा रहा है।” राज्य सरकार जहाँ युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से मुक्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, वहीं राजस्थान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों के किनारे संचालित हो रही शराब दुकानों के खिलाफ एक कठोर और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। इस फैसले के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि—क्या महाराष्ट्र में भी हाईवे किनारे स्थित शराब दुकानों पर कार्रवाई होगी?
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: क्या कहा अदालत ने?
कन्हैया लाल सोनी बनाम राजस्थान सरकार मामले में फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने शराब के नशे में वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया:
1. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन
सर्वोच्च न्यायालय ने स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के. बालू मामले में यह स्पष्ट किया था कि राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी के भीतर शराब दुकानें नहीं होनी चाहिए। न ही ये दुकानें हाईवे से दिखाई दें और न ही इनकी सीधी पहुँच उपलब्ध हो। अदालत ने कहा कि राजस्थान सरकार ने इन निर्देशों को गलत और सुविधानुसार लागू किया।
2. सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी
राजस्थान सरकार ने राजस्व का हवाला देते हुए 1102 शराब दुकानों को हाईवे के निकट संचालन की अनुमति दी थी, जिससे 2221.78 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। इस पर न्यायालय ने कहा, “राजस्व की आवश्यकता नागरिकों के जीवन और सड़क सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हो सकती। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षा देना राज्य की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।”
3. ऐतिहासिक आदेश
अदालत ने आदेश दिया कि हाईवे से 500 मीटर की सीमा में स्थित सभी 1102 शराब दुकानों को दो महीनों के भीतर हटाया या स्थानांतरित किया जाए। साथ ही दुकानों के विज्ञापन और बोर्ड हाईवे से दिखाई नहीं देने चाहिए। यह आदेश नगरपालिका क्षेत्र में स्थित दुकानों पर भी लागू होगा।
महाराष्ट्र के सामने गंभीर चुनौती
राजस्थान में नशे में ड्राइविंग के मामलों में लगभग 8% वृद्धि के बाद यह कदम उठाया गया। महाराष्ट्र में भी शराब सेवन और उससे होने वाली दुर्घटनाओं के मामले चिंताजनक हैं। जहाँ मुख्यमंत्री ‘नशा मुक्त महाराष्ट्र’ पर जोर दे रहे हैं, वहीं हाईवे के पास शराब की आसान उपलब्धता सड़क हादसों में बढ़ोतरी का बड़ा कारण बनी हुई है।
एड. महेश एस. धन्नावत की प्रतिक्रिया
जालना के वरिष्ठ अधिवक्ता एड. महेश एस. धन्नावत ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा:
“राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय पूरे देश के लिए मिसाल है। यह संविधान के अनुच्छेद 21—‘जीवन के मौलिक अधिकार’—को सर्वोपरि मानता है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश जनता की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। राजस्व के नाम पर इन्हें अनदेखा करना नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ है। ‘नशा मुक्त महाराष्ट्र’ पहल को शराब बिक्री पर सख्त नियंत्रण तक विस्तारित किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में भी राजस्थान की तर्ज पर शराब दुकानें हटाई जानी चाहिए।”
अब सबकी निगाहें महाराष्ट्र सरकार पर
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार राजस्व को प्राथमिकता देती है या नागरिकों के जीवन और सुरक्षा को। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है।
एड. महेश एस. धन्नावत (Adv. Mahesh S. Dhannawat)
B.Com, LL.M, G.D.C. & A.
पूर्व उपाध्यक्ष, जालना जिला बार एसोसिएशन
शिवकृपा, कालिकुर्ती, डॉ. आर.पी. रोड, जालना (महाराष्ट्र) – 431203
मो.: 9326704647 / 02482-233581
Email: dhannawat.mahesh@gmail.com

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