ठेके पर काम करने वालों को पक्की नौकरी में पहली प्राथमिकता देना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला
नई दिल्ली | प्रतिनिधि:
देशभर में ठेके पर काम कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि जब भी कोई नियोक्ता ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों की जगह नियमित (पक्के) कर्मचारियों की नियुक्ति करने का फैसला ले, तो उसे सबसे पहले पहले से कार्यरत ठेका कर्मचारियों को ही मौका देना होगा। नियोक्ता पुराने कर्मचारियों को नजरअंदाज कर खुले बाजार से सीधे नई भर्ती नहीं कर सकता।
यह महत्वपूर्ण निर्णय न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एस. वी. एन. भट्टी की पीठ ने सुनाया। इस फैसले को ठेका कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कोर्ट के इस आदेश से सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में वर्षों से ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अनुभव को नहीं किया जा सकता नजरअंदाज
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ठेके पर वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के अनुभव और मेहनत को अनदेखा करना अन्यायपूर्ण है। यदि कोई पद तकनीकी नहीं है, तो नियोक्ता को ठेका कर्मचारियों को नियमित करते समय अधिकतम आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता में उचित छूट देने पर भी विचार करना चाहिए। इससे लंबे समय से काम कर रहे अनुभवी कर्मचारियों को पक्की नौकरी पाने का अवसर मिलेगा और उनका कौशल बेकार नहीं जाएगा।
कर्मचारियों के हित में फैसला
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह कर्मचारियों के हित में है। इससे उन्हें नौकरी में स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, नियोक्ता ठेका प्रथा का गलत इस्तेमाल कर कर्मचारियों को नियमित सेवा के लाभों से वंचित नहीं कर पाएंगे।
एडवोकेट महेश धन्नावत की प्रतिक्रिया
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नोटरी एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष एडवोकेट महेश धन्नावत ने कहा कि यह ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों के लिए बड़ी जीत है। उन्होंने कहा,
“सालों से चली आ रही अनिश्चितता और शोषण पर इस फैसले से रोक लगेगी। नियोक्ता अब ठेका प्रणाली का दुरुपयोग कर कर्मचारियों को नियमित नौकरी के लाभों से वंचित नहीं रख सकेंगे। इससे मालिक और कर्मचारी के रिश्तों में पारदर्शिता आएगी। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
फर्जी ठेका व्यवस्था पर सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों पर भी कड़ा रुख अपनाया है, जहां ठेका व्यवस्था केवल दिखावे के लिए होती है और असल में नियोक्ता–कर्मचारी का सीधा संबंध छिपाया जाता है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह साबित हो जाए कि कर्मचारियों पर पूरा नियंत्रण और निगरानी मुख्य नियोक्ता की ही थी, तो ऐसी ठेका व्यवस्था को फर्जी माना जाएगा।
ऐसे मामलों में कर्मचारियों को सीधे मुख्य नियोक्ता का कर्मचारी माना जाएगा और उन्हें नियमित करने के निर्देश दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, उन्हें सेवा की शुरुआत से या न्यायाधिकरण द्वारा तय की गई तारीख से नियमित कर्मचारियों के समान सभी बकाया वेतन और अन्य लाभ भी देने होंगे।
मामला किससे जुड़ा था
यह मामला औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33(1) के तहत औद्योगिक न्यायालय द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश के खिलाफ प्रबंधन द्वारा दायर अपील से संबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने औद्योगिक न्यायालय और उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों को रद्द कर दिया, लेकिन कर्मचारियों को दोबारा औद्योगिक न्यायालय में जाकर न्याय मांगने की पूरी छूट दी है।
आगे का रास्ता
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी ठेका व्यवस्था को फर्जी घोषित कराने और नियमित भर्ती में प्राथमिकता पाने के लिए कानून के तहत उचित राहत मांग सकते हैं। यह फैसला आने वाले समय में श्रम कानूनों की व्याख्या और ठेका प्रथा पर गहरा असर डाल सकता है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है और इसे श्रमिक अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
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Q1. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला किसके लिए है?
यह फैसला ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए है, जो लंबे समय से किसी संस्थान या कंपनी में कार्यरत हैं।
Q2. इस फैसले के अनुसार नियोक्ता को क्या करना होगा?
जब नियोक्ता नियमित (पक्की) पदों पर भर्ती करेगा, तो उसे पहले से काम कर रहे ठेका कर्मचारियों को प्राथमिकता देनी होगी।
Q3. क्या नियोक्ता बाहर से सीधे नई भर्ती कर सकता है?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, पुराने ठेका कर्मचारियों को नजरअंदाज कर खुले बाजार से सीधे नई भर्ती नहीं की जा सकती।
Q4. क्या उम्र और योग्यता में छूट मिलेगी?
हाँ। कोर्ट ने कहा है कि यदि पद तकनीकी नहीं है, तो उम्र सीमा और शैक्षणिक योग्यता में उचित छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए।
Q5. फर्जी ठेका व्यवस्था का क्या मतलब है?
जब ठेका व्यवस्था सिर्फ दिखावे के लिए हो और असल में कर्मचारियों पर पूरा नियंत्रण मुख्य नियोक्ता का हो, तो ऐसी व्यवस्था को फर्जी माना जाएगा।
Q6. फर्जी ठेका साबित होने पर कर्मचारियों को क्या लाभ मिलेगा?
ऐसे मामलों में कर्मचारियों को सीधे मुख्य नियोक्ता का कर्मचारी माना जाएगा और उन्हें पक्की नौकरी, बकाया वेतन और अन्य सभी लाभ दिए जाएंगे।
Q7. यदि किसी कर्मचारी को न्याय नहीं मिले तो वह क्या कर सकता है?
कर्मचारी औद्योगिक न्यायालय में जाकर ठेका व्यवस्था को फर्जी घोषित कराने और नियमित नौकरी में प्राथमिकता के लिए कानूनी राहत मांग सकता है।
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