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अवैध घुसपैठ पर सख्त प्रहार: बांग्लादेशी चोरों को 2 साल की सजा | जालना कोर्ट फैसला

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अवैध घुसपैठ पर सख्त प्रहार: बांग्लादेशी चोरों को दो साल की सजा

जालना सत्र न्यायालय का स्पष्ट संदेश—भारत में अपराध और फर्जी पहचान के लिए कोई जगह नहीं

जालना:
अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर सुनियोजित ढंग से चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ जालना जिला एवं सत्र न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। दिनांक 9 फरवरी को जिला एवं सत्र न्यायाधीश–02, जालना, एन. एस. शेख ने परतूर पुलिस स्टेशन में दर्ज दो अलग-अलग मामलों में दोष सिद्ध पाए आरोपियों को प्रत्येक धारा के तहत दो वर्ष के कारावास और 500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपियों को दो दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। बांग्लादेशी घुसपैठिए चोरी मामला जालना.

अदालत ने अपने फैसले में साफ शब्दों में कहा कि घुसपैठ, फर्जी पहचान और अपराध—इन तीनों पर कानून की जीरो टॉलरेंस नीति लागू होगी। यह निर्णय न केवल दोषियों के लिए, बल्कि ऐसे अपराधों में लिप्त या संलिप्त होने की मंशा रखने वालों के लिए भी एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।


किन मामलों में सुनाई गई सजा

अपराध क्रमांक 122/2024 (परतूर पुलिस स्टेशन)

इस मामले में आरोपियों—

  1. कुर्बान शाहीन आलम मंडाल
  2. जाकेर फकीर बारीक फकीर शेख
  3. शुमोन जुनेद अली शेख

को भारतीय दंड संहिता की धाराएं 457, 380, 420, 464, 471, 468, 34 के साथ-साथ पासपोर्ट अधिनियम, विदेशी नागरिक आदेश (धारा 3(1)(अ)) एवं विदेशी नागरिक अधिनियम (धारा 14) के अंतर्गत दोषी ठहराया गया।

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अपराध क्रमांक 124/2024 (परतूर पुलिस स्टेशन)

दूसरे मामले में आरोपियों—

  1. सलमान शुमोन शेख
  2. कुर्बान शाहीन आलम मंडाल
  3. जाकेर फकीर बारीक फकीर शेख
  4. शुमोन जुबेद अली शेख

को भी समान धाराओं के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने दोनों मामलों में प्रत्येक धारा के अंतर्गत दो-दो वर्ष का कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई।


पूरा मामला संक्षेप में

मामला 122/2024

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 7 और 8 मार्च 2024 की दरम्यानी रात परतूर स्थित गोकुलधाम सोसायटी के एक मकान को निशाना बनाया गया। घर के सभी सदस्य बाहर गए हुए थे। इस अवसर का लाभ उठाते हुए आरोपियों ने खिड़की की लोहे की ग्रिल को कटर से काटा और घर में प्रवेश किया। इसके बाद अलमारी से 5,000 रुपये नकद चोरी कर लिए गए।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पहचान छिपाने के उद्देश्य से आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र तैयार किए थे, जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया गया।

मामला 124/2024

दूसरी घटना 9 मार्च 2024 की रात करीब 2:30 बजे की है। आरोपियों ने परतूर क्षेत्र के सीतानंद पार्क स्थित एक अन्य मकान की पीछे की खिड़की की ग्रिल तोड़कर प्रवेश किया। घर के भीतर अलमारी तोड़कर 10,000 रुपये नकद चोरी किए गए और आरोपी मौके से फरार हो गए।


जांच और न्यायिक प्रक्रिया

दोनों मामलों की जांच वी. बी. केंद्रे, पुलिस उपनिरीक्षक, परतूर पुलिस स्टेशन द्वारा की गई। विस्तृत जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपियों ने अपराध स्वीकार करने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया। सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

सरकार पक्ष की ओर से जयश्री बी. सोलंके, अतिरिक्त सरकारी अभियोजक ने प्रभावी पैरवी की। संपूर्ण कार्रवाई बंसल, पुलिस अधीक्षक, जालना तथा आयुष नोपाणी, अपर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इसके अलावा पुलिस उपविभागीय अधिकारी परतूर, तत्कालीन पुलिस निरीक्षक सुरवसे, वर्तमान पुलिस निरीक्षक भागवत, कोर्ट पैरवी अधिकारी और जिला सरकारी वकील कार्यालय के कर्मचारियों का भी सराहनीय सहयोग रहा।


A group photo of four individuals, including three policewomen in uniforms and one woman in a formal black suit, standing together in an office setting with a decorative background.
Legal professionals and police officials standing together highlighting law enforcements commitment to combatting organized crime

कड़ा संदेश

यह फैसला अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और चोरी जैसी संगठित आपराधिक गतिविधियों में लिप्त तत्वों के लिए स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है। कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण और सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।

बांग्लादेशी घुसपैठिए चोरी मामला जालना.


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