नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु Asaram Bapu को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत रद्द करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। फैसले के तुरंत बाद आसाराम ने गुरुवार शाम जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से इस बहुचर्चित मामले को सुर्खियों में ला दिया है और उनके समर्थकों में भी हलचल देखी जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जेल परिसर में कड़ी निगरानी रखी गई।
“आस्था और भरोसे का हुआ कत्ल” कोर्ट की सख्त टिप्पणी
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने अपने फैसले में बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को पीड़िता भगवान मानती थी, उसी ने उसकी आस्था और भरोसे को तोड़ा। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस प्रकार के अपराध से पीड़िता की गरिमा, मासूमियत और स्वतंत्रता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कोर्ट की यह टिप्पणी मामले की गंभीरता को और भी स्पष्ट करती है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं हो सकती। इस फैसले के बाद कानूनी हलकों में भी इसे एक अहम निर्णय माना जा रहा है।
एयरपोर्ट से जेल तक समर्थकों की भीड़ और हंगामा
फैसले के बाद जब Asaram Bapu जोधपुर पहुंचे तो एयरपोर्ट के बाहर उनके समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। समर्थकों ने उन्हें फूलमालाओं से स्वागत किया और उनके पक्ष में नारेबाजी भी की। इसके बाद वह कार से अपने पाल स्थित आश्रम पहुंचे और वहां कुछ समय बिताया। बाद में मेडिकल जांच के लिए उन्हें AIIMS जोधपुर ले जाया गया, जहां औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। शाम होते-होते उन्होंने स्वयं जाकर जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। पुलिस लगातार भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रही।
2018 से जारी है सजा. अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
यह पूरा मामला 2013 में सामने आया था जब एक नाबालिग पीड़िता जोधपुर स्थित आश्रम में पहुंची थी और उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। इस मामले में 2018 में अदालत ने Asaram Bapu को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालिया फैसले में हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया है, लेकिन दुष्कर्म के मुख्य आरोप में सजा को बरकरार रखा गया है। अब उनके वकील इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आगे भी लंबी कानूनी लड़ाई जारी रह सकती है।
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