प्रधानमंत्री को चुनाव प्रचार से दूर रखने का कानून बने — यूसुफ़ रज़ा क़ादरी मदनी की मांग
नई दिल्ली: जामिया हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, नई दिल्ली के सदस्य मुहम्मद यूसुफ़ रज़ा क़ादरी मदनी ने देश के प्रधानमंत्री द्वारा चुनाव प्रचार में भाग लेने पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री को चुनाव प्रचार करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”
क़ादरी मदनी का कहना है कि प्रधानमंत्री देश के 130 करोड़ नागरिकों के प्रतिनिधि हैं, लेकिन जब वे चुनावी मंच पर जाते हैं, तो वे केवल एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता बनकर रह जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री पद की गरिमा को अभूतपूर्व तरीके से ठेस पहुँची है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा चुनाव प्रचार में दिए गए भाषण कई बार नफरत फैलाने वाले और विपक्ष को अपमानित करने वाले रहे हैं, जो देश के सर्वोच्च पद की मर्यादा के अनुकूल नहीं है।”
क़ादरी मदनी ने मांग की कि संसद को ऐसा कानून बनाना चाहिए जो प्रधानमंत्री को चुनावी प्रचार से दूर रखे। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को केवल शासन और प्रशासन की भूमिका निभानी चाहिए, न कि किसी पार्टी के लिए वोट मांगने की।
उन्होंने कहा कि “मोदी से पहले भी कई प्रधानमंत्री हुए हैं, लेकिन किसी ने भी इस पद की गरिमा को इस स्तर तक नहीं गिराया। डॉ. मनमोहन सिंह ने दस वर्षों तक अत्यंत संयम और गंभीरता से यह जिम्मेदारी निभाई थी, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है।”
यूसुफ़ रज़ा क़ादरी मदनी ने यह भी कहा कि बिहार चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयानों और प्रचार की शैली ने इस मांग को और अधिक प्रासंगिक बना दिया है।
अंत में उन्होंने कहा कि “देश को ऐसा कानून चाहिए जो प्रधानमंत्री के पद की मर्यादा और निष्पक्षता दोनों की रक्षा करे।”

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