मिलाद-उन-नबी पर विभाजन नहीं, एकता और सेवा से मनाएँ खुशी
जालना। मिलाद-उन-नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के अवसर पर समाज में विभिन्न मतभेदों के बावजूद एकता और प्रेम का संदेश देते हुए अपील की गई है कि हर व्यक्ति अपनी खुशी का इज़हार अपने तरीके से करें, लेकिन शिष्टाचार और सम्मान का ख़ास ध्यान रखें।
संदेश में कहा गया है कि जो लोग मिलाद-उन-नबी के जुलूस पर आपत्ति करते हैं, वे बैठक कर अपने विचार साझा कर सकते हैं। जो लोग बैठक पर आपत्ति करते हैं, वे दिल से खुशी का इज़हार करें। इसी तरह, जो लोग बर्तन बाँटना पसंद नहीं करते, वे अनाथालयों में अनाथ बच्चों की आर्थिक मदद कर सकते हैं।
जो लोग 12 रबीउल अव्वल की तारीख पर सहमत नहीं हैं, वे वह तारीख मना सकते हैं जिसे वे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के जन्मदिन के रूप में सही मानते हैं। जो लोग झंडे पर सहमत नहीं हैं, वे गरीबों को कपड़े बाँट सकते हैं। सोमवार के दिन रोज़ा रखकर भी खुशी का इज़हार किया जा सकता है।
दीये जलाने के विरोधियों से कहा गया है कि वे मस्जिदों के बिजली बिल का भुगतान कर इस महीने को रोशन कर सकते हैं। सबसे अहम बात यह है कि पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से प्रेम, उम्मत के लिए प्रेम की भी माँग करता है, और इस पवित्र अवसर पर किसी भी प्रकार का विभाजन नहीं होना चाहिए।

