इंग्लिश मीडियम छात्रों ने दो माह में पूरा किया 28वां पारा — तर्जुमा व तफ्सीर सहित
तफहीमुल कुरआन संस्था की मिसाली पहल
जालना: जालना स्थित इदारा तफहीमुल कुरआन वल हदीस द्वारा इंग्लिश मीडियम में पढ़ने वाले छात्रों के लिए चलाई जा रही दीनी शिक्षा की यह पहल आज एक मिसाल बन गई है। संस्था के ज़ेरे एहतेमाम, कदीम जालना के दुखीनगर स्थित खसरे गरीब नवाज में चल रहे आलिम कोर्स के तहत छात्रों ने महज़ दो माह में पवित्र कुरआन के 28वें पारे का तर्जुमा और तफ्सीर सहित अध्ययन मुकम्मल कर लिया।
यह कदम इस्लामी शिक्षाओं की समझ, आत्मसात और अमल की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संस्था के प्रमुख मौलाना सैय्यद जमी़ल अहमद रज़वी ने बताया कि यह छात्र दिन में इंग्लिश मीडियम स्कूलों/कॉलेजों में पढ़ते हैं और शाम को संस्था में नियमित रूप से दीनी तालीम हासिल करते हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक और धार्मिक शिक्षा साथ-साथ चल सकती है।
मौलाना ने कहा कि यही बच्चे आगे चलकर दीन के रौशन मीनार बनेंगे जिनके सीने में कुरआन व हदीस की रौशनी होगी और जबान पर हिकमत के मोती।
मुहम्मद सुफ़यान, सैय्यद हसनैन, अरीब ख़ान, फ़ैज़ान रज़ा, मुजतबा सिद्दीक़ी, मुज़क्कीर सिद्दीक़ी और मीरान अहमद।
संस्था ने इन छात्रों को मुबारकबाद दी और अल्लाह से दुआ की कि वो इन छात्रों को दीन व दुनिया की भलाई अता फरमाए और कुरआन को उनका मार्गदर्शक बनाए।
संस्था ने मौलाना तौफ़ीक़ रज़ा मिसबाही का भी शुक्रिया अदा किया जिनकी दरसगाह से छात्रों ने शुरुआती दीनी तालीम हासिल की।
मौलाना नौशाद रज़ा अलीमी,
मौलाना अरमान अली अलीमी,
मौलाना फैज़ुर रज़ा मिसबाही,
मास्टर सादिक़ साहब।
कोर्स में केवल कुरआन मजीद का तर्जुमा व तफ्सीर ही नहीं, बल्कि कई अहम दीनी किताबें भी पढ़ाई जा रही हैं. इनमें खास तौर पर क़ुरआन मजीद (तर्जुमा व तफ्सीर के साथ), मिश्कात शरीफ़, हिदाया अव्वलीन, और उसूल-अश-शाशी शामिल हैं. ये सभी किताबें इस्लामी इल्म की बुनियादी किताबों में शुमार होती हैं, जो तलबा को फिकह, हदीस, उसूल-ए-फिकह और कुरआनी तफ्सीर की गहराई से समझ प्रदान करती हैं. इन किताबों की मदद से छात्रों को ना सिर्फ़ अक़ीदे और मसाइल का इल्म मिलता है, बल्कि दीनी सोच और समझदारी भी मज़बूत होती है. कोर्स के तहत छात्रों को कुरान ए पाक का इंग्लिश, हिंदी और मराठी तर्जुमा भी सिखाया जा रहा है. जिन विद्यार्थियों ने यह सफलता हासिल की है यह उनके कोर्स का पांचवा साल है और आगामी वर्ष में उन्हें बुखारी शरीफ भी पढ़ाई जाएगी.
छात्रों को कुरआन का इंग्लिश, हिंदी और मराठी में तर्जुमा भी सिखाया जा रहा है। यह उनका कोर्स का पांचवां साल है और अगले साल उन्हें बुखारी शरीफ भी पढ़ाई जाएगी।
ग़ौरतलब है कि इन सभी छात्रों ने इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई के साथ-साथ दीनी तालीम में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है. तफहीमुल कुरआन वल हदीस संस्था द्वारा संचालित यह आलिम कोर्स इस बात की मिसाल है कि नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ इस्लामी मूल्य भी दिए जा सकते है. संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि इस शिक्षण क्रम को आगे बढ़ाते हुए अन्य पारों व विषयों की पढ़ाई भी सिलसिलेवार ढंग से कराई जाएगी, जिससे छात्र एक मुकम्मल इंसान और एक सच्चे मुसलमान के रूप में आगे बढ़ सकें. यह कोर्स साबित करता है कि नई पीढ़ी को इस्लामी मूल्य और आधुनिक ज्ञान एक साथ दिया जा सकता है। संस्था ने यह भी घोषणा की कि अगले चरण में अन्य पारों और विषयों की पढ़ाई भी कराई जाएगी।

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