जालना में ‘जश्न-ए-यौमे सिद्दीक़-ए-अकबर (RA)’ पर प्रभावशाली तक़रीरी प्रतियोगिता
जालना: दारगाह हज़रत सैयद अहमद शेर सवार (RA) के मुबारक अहाते में स्थित दारुल उलूम गुलशन-ए-क़ादरी अनवार-ए-रज़ा में जुमे के दिन “जश्न-ए-यौमे सिद्दीक़-ए-अकबर (RA)” के मौके पर भव्य तक़रीरी (भाषण) प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। बच्चों ने गहरे जज़्बे और उत्साह के साथ भाग लेते हुए बेहद असरदार और दिल को छू लेने वाले ख़ुत्बे पेश किए, जिन्हें उपस्थित श्रोताओं से भरपूर सराहना मिली।
इनाम और विजेताओं का विवरण
- प्रथम: मोहम्मद समीर रज़ा (जमात सालिसा) — बहार-ए-शरीअत (3 जिल्द), ₹1200 नकद और ट्रॉफी
- द्वितीय: जुनैद रज़ा (जमात हिफ़्ज़) — 4 किताबें, ₹1000 नकद और ट्रॉफी
- तृतीय: मोहम्मद खुर्शीद रज़ा (जमात सानिया) — 3 किताबों का सेट, ₹700 नकद और ट्रॉफी
- चौथा: मोहम्मद नफ़ीस — 2 किताबों का सेट और ₹500 नकद
- पाँचवाँ: फिरोज़ रज़ा — 2 किताबों का सेट और ₹500 नकद
अन्य प्रतिभागियों — साबिर रज़ा, अफ़रोज़ रज़ा, समीर रज़ा, वज़ीर आलम, मुहर्रम अली, रेहान रज़ा और सैयद ग़ुलाम गौस — को प्रशस्ति पत्र और नकद राशि देकर प्रोत्साहित किया गया।

आयोजन और अभिभाषण
कार्यक्रम की सदारत करते हुए दारुल उलूम के संस्थापक सैयद जमी़ल अहमद रज़वी ने सभी छात्रों की कोशिशों की प्रशंसा की और कहा कि आगामी वर्षों में इस कार्यक्रम को और व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा: “आज के दौर में दीन की दावतमंदी और लोगों तक हक़ की आवाज़ पहुँचाने में तक़रीर सबसे प्रभावी माध्यम है। यह फ़न तलबा में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और खिदमत-ए-दीन का जज़्बा पैदा करता है।”
निर्णायक के रूप में मौजूद प्रसिद्ध आलिम मौलाना मोहम्मद ग़ुलाम जिलानी मिस्बाही ने मदरसों में ऐसे कार्यक्रमों की अहमियत पर ज़ोर दिया और इसे अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के लिए अनुकरणीय बताया।
मुख्य अतिथि एवं शिक्षक
कार्यक्रम में दारुल उलूम के असातिज़ा — मौलाना नोशाद अलीमी, मौलाना अरमान अलीमी, हाफ़िज़ अमजद रज़वी, कारी अब्दुर रऊफ, मौलाना तौफ़ीक़ मिस्बाही, मौलाना फ़ैज़ रज़ा मिस्बाही, काज़ी सैयद उमर रज़वी, मौलाना मसीहुद्दीन अलीमी और हाफ़िज़ सरताज — उपस्थित रहे।

साथ ही शहर के प्रमुख सुन्नी उलेमा — मुफ़्ती ग़ुलाम नबी अमजदी, मौलाना हारून जामी, मौलाना अब्दुर रज़्ज़ाक, हाफ़िज़ रेहान, हाफ़िज़ मुजाहिद और हाफ़िज़ मुनव्वर — और नामचीन नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम के अंत में हज़रत सिद्दीक़-ए-अकबर (RA) के नाम पर विशेष लंगर वितरित किया गया और सामूहिक दुआओं के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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