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दसवीं और बारहवीं परीक्षा के लिए बड़ा निर्णय: परीक्षा केंद्रों पर छात्र, शिक्षक और कर्मचारियों को अलग किया जाएगा

Big decision for 10th and 12th exams: Students, teachers and staff will be separated at the examination centers

मुंबई: महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं (SSC) और बारहवीं (HSC) परीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत, जिन परीक्षा केंद्रों पर किसी स्कूल के छात्र परीक्षा देंगे, वहां उसी स्कूल के शिक्षक और कर्मचारी नियुक्त नहीं किए जाएंगे। परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अन्य स्कूलों से केंद्र संचालक, पर्यवेक्षक और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। इस संबंध में बोर्ड ने सभी विभागीय कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

नकल मुक्त अभियान के तहत जागरूकता सप्ताह का आयोजन

आगामी फरवरी-मार्च 2025 में आयोजित होने वाली दसवीं और बारहवीं परीक्षाओं को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने राज्यभर में “नकल मुक्त अभियान” चलाने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत, 20 जनवरी से 26 जनवरी 2025 तक जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य छात्रों को नैतिक रूप से परीक्षा देने के लिए प्रेरित करना और अभिभावकों को परीक्षा के नियमों के प्रति जागरूक करना है।

परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए महत्वपूर्ण उपाय

शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा के निष्पक्ष संचालन के लिए निम्नलिखित प्रमुख उपायों की घोषणा की है:

1. जागरूकता और मार्गदर्शन: परीक्षा केंद्रों पर किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को जागरूक किया जाएगा।

2. समय पर परीक्षा संचालन: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू हो और समय पर समाप्त हो।

3. सुरक्षा व्यवस्था: प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर पुलिस तैनात की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर धारा 144 लागू की जाएगी।

4. उड़नदस्ते की नियुक्ति: हर जिले में उड़नदस्ते तैनात किए जाएंगे, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

5. निरीक्षण दल: परीक्षा केंद्रों की नियमित जांच के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।

राज्य के पुणे, मुंबई, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, कोल्हापुर, अमरावती, नासिक, लातूर और कोंकण इन नौ विभागीय बोर्डों के अंतर्गत लगभग 31 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए राज्य शिक्षा विभाग द्वारा व्यापक योजना बनाई गई है।

निष्कर्ष:

महाराष्ट्र बोर्ड द्वारा लिए गए इस निर्णय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। छात्रों को एक अनुशासित और सुरक्षित माहौल में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। बोर्ड ने अभिभावकों, शिक्षकों और प्रशासन से इस अभियान में पूर्ण सहयोग देने की अपील की है।


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Imran Siddiqui

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