जालना जिले में पहला देहदान: बाबूलालजी सुराणा का अमर निर्णय, मानवता और चिकित्सा शिक्षा को मिली नई राह
पार्थिव देह जालना शासकीय मेडिकल कॉलेज को सुपुर्द
जालना —
जालना शहर और पूरे जिले के इतिहास में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायी क्षण दर्ज हो गया है, जिसने शोक को सेवा में और विदाई को अमरता में बदल दिया। जालना के जैन समाज के प्रतिष्ठित श्रावक श्री बाबूलालजी सुराणा के निधन के उपरांत उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप किया गया देहदान, जालना जिले का पहला देहदान बनकर इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया है। यह निर्णय मानवता, चिकित्सा शिक्षा और समाजहित के लिए दूरगामी प्रभाव रखने वाला माना जा रहा है।
अपने जीवन की अंतिम कामना को पूर्ण करते हुए श्री सुराणा ने यह सिद्ध कर दिया कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि सेवा का नया आरंभ भी हो सकती है। उनके इस महान संकल्प का सम्मान करते हुए उनकी सुपुत्री सौ. अर्चना सुभाष भंडारी और दामाद श्री सुभाष भंडारी ने पार्थिव देह को शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, जालना को समर्पित किया। इससे पूर्व गणपति नेत्रालय में नेत्रदान की प्रक्रिया भी पूर्ण की गई। यह क्षण न केवल परिवार के लिए, बल्कि उपस्थित समाजबंधुओं और नागरिकों के लिए भी अत्यंत भावुक कर देने वाला रहा।
जब विदाई बनी वरदान
इस अवसर पर जालना शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. सैय्यद अफरोज फातिमा तथा शरीर रचना शास्त्र विभाग प्रमुख डॉ. प्रतिभा कुलकर्णी ने सुराणा परिवार के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह देहदान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आशा का दीपक है।
शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, जालना में अध्ययनरत सैकड़ों चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए यह देहदान अनमोल ज्ञान का स्रोत बनेगा।
विशेष रूप से शरीर रचना शास्त्र (एनाटॉमी) जैसे विषयों में प्रत्यक्ष मानव देह पर अध्ययन, पुस्तकीय ज्ञान की तुलना में कहीं अधिक गहन, व्यावहारिक और प्रभावशाली माना जाता है।
इस एक निर्णय से—
- विद्यार्थियों को मानवीय शरीर की वास्तविक और सूक्ष्म समझ प्राप्त होगी,
- भविष्य के डॉक्टर अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार और मानवीय बनेंगे,
- मराठवाड़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी,
- चिकित्सा अनुसंधान और शल्य-चिकित्सा कौशल के विकास को दिशा मिलेगी।

मानवता के नाम सबसे बड़ा दान
देहदान केवल शरीर दान नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य में किया गया निवेश है। यह ऐसा योगदान है, जो किसी एक व्यक्ति के जाने के बाद भी हजारों जीवनों की रक्षा का माध्यम बनता है। धर्म, जाति और पहचान से ऊपर उठकर समाज और विज्ञान के लिए किया गया यह कार्य सही अर्थों में महादान माना जाता है।
समाज को आईना दिखाता एक निर्णय
इस भावुक अवसर पर उपस्थित परिजन, समाजबंधु और नागरिक केवल शोक में डूबे नहीं थे, बल्कि एक नई सोच से प्रेरित भी दिखाई दिए। कई लोगों ने न केवल देहदान का संकल्प लेने की भावना व्यक्त की, बल्कि इस दिशा में जनजागृति फैलाने का भी प्रण लिया।
श्री बाबूलालजी सुराणा का यह निर्णय समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है—
“हम अपने जाने के बाद समाज को क्या देकर जा रहे हैं?”
मरणोपरांत भी समाज के काम आने की यह भावना—
👉 वास्तव में अमरत्व है।
निष्कर्ष: एक व्यक्ति, एक संकल्प, अनगिनत जीवन
जालना जिले का यह पहला देहदान—
- चिकित्सा शिक्षा के लिए नई शुरुआत,
- समाजप्रबोधन की नई दिशा,
- और मानवता के उच्चतम आदर्श का प्रतीक है।
श्री बाबूलालजी सुराणा भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों,
लेकिन उनका संकल्प, उनका विचार और उनका योगदान
सदैव जीवित रहेगा।
इस अवसर पर जालना शासकीय मेडिकल कॉलेज में विनयकुमार कोठारी, अजीतदादा कोठारी, तनुज बाहेती, गोपाल गोमतीवाले, कन्हैय्या रामरख्या मितवा, राजेश लुणीय सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कई लोगों ने देहदान का प्रण लेने के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने का भी संकल्प किया।
🙏 भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
उनका यह निर्णय—समाज, विज्ञान और मानवता के लिए—सदैव मार्गदर्शक बना रहे।

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