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भारत में अधिक काम, कम उत्पादकता और वेतन: वर्क-लाइफ बैलेंस पर उठे सवाल

More work, less productivity and pay in India: Questions raised on work-life balance

परिचय

हाल ही में लार्सन एंड टुब्रो के चेयरमैन एस.एन. सुब्रह्मण्यन द्वारा सप्ताह में 90 घंटे और रविवार को भी काम करने का सुझाव चर्चा का विषय बना हुआ है. इस बयान ने वर्क-लाइफ बैलेंस और श्रम उत्पादकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है. हालांकि, महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि काम के घंटे से ज्यादा आउटपुट पर ध्यान देना जरूरी है.

भारत में काम के घंटे और वेतन की स्थिति
भारतीय श्रम कानून के अनुसार, कर्मचारियों को प्रति दिन 9 घंटे और सप्ताह में एक अवकाश का अधिकार है. बावजूद इसके, भारत में 51% कर्मचारी हर सप्ताह 49 घंटे से अधिक काम करते हैं.

काम के घंटे: भारत में औसत कार्य समय 46.7 घंटे प्रति सप्ताह है, जो दुनिया में सबसे अधिक है.

मासिक वेतन: औसत मासिक आय केवल $220 है, जो कई देशों की तुलना में बेहद कम है.

उत्पादकता: भारतीय श्रम उत्पादकता प्रति घंटे मात्र $8 है, जो विकासशील देशों में सबसे कम है.

श्रम उत्पादकता में गिरावट

2022-23 में कुछ उद्योगों में श्रम उत्पादकता की वृद्धि बेहद धीमी रही. निर्माण क्षेत्र में यह केवल 2.9% रही, जबकि कृषि क्षेत्र में यह 2.7% रही. वहीं, धातु उत्पाद और खाद्य उत्पादन जैसे क्षेत्रों में गिरावट देखी गई.

लंबे समय तक काम और उत्पादकता पर प्रभाव
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन पेनकेवेल के एक अध्ययन में पाया गया कि 50 घंटे से अधिक काम करने पर उत्पादकता में गिरावट शुरू हो जाती है. 55 घंटे के बाद आउटपुट और भी कम हो जाता है.

इसके अलावा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ILO के एक विश्लेषण में यह सामने आया कि लंबे समय तक काम करने से हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। 2016 में लंबे काम के घंटे के कारण लगभग 7.5 लाख लोगों की मौत हुई थी.

ओवरटाइम कानून और भारतीय संदर्भ

कई देशों में ओवरटाइम के लिए नियमित वेतन से 50% अधिक प्रीमियम दिया जाता है. भारत में ब्लू कॉलर कर्मचारियों के लिए यह दर दोगुनी है, लेकिन व्हाइट कॉलर कर्मचारियों के लिए यह स्पष्ट नहीं है.

निष्कर्ष

भारत में श्रम उत्पादकता और वेतन सुधार की आवश्यकता है. काम के घंटे बढ़ाने के बजाय उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना जरूरी है.वर्क-लाइफ बैलेंस को बनाए रखते हुए श्रमिकों के अधिकारों का सम्मान करना समय की मांग है.


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Imran Siddiqui

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